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संपत्ति का सही और पूर्ण विवरण न देने में घिरे मंत्री
भोपाल । मप्र सरकार के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ एक और याचिका दायर की गई है। यह याचिका उनके निवचिन को चुनौती देती है, जिसमें आरोप है कि चुनाव के समय उन्होंने अपनी संपत्ति सही तरीके से घोषित नहीं की और गलत हलफनामा दिया। कांग्रेस नेता नीरज शर्मा ने यह आरोप लगाते हुए इलेक्शन कमीशन में शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब नीरज शर्मा ने इस मामले को हाईकोर्ट में पहुंचाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव के दौरान गोविंद सिंह राजपूत ने अपनी संपत्ति का सही और पूर्ण विवरण निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया। साथ ही, इस मामले को लेकर निर्वाचन आयोग को की गई शिकायत पर वर्षों से कोई निर्णय न लिए जाने को लेकर आयोग की कथित निष्क्रियता को भी चुनौती दी गई है।
गोविंद सिंह राजपूत ने 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नीरज शर्मा को हराकर सुरखी विधानसभा से जीत हासिल की थी। शर्मा ने आरोप लगाया था कि राजपूत ने अपनी संपत्ति को छुपाया था, जिसका ब्यौरा चुनाव आयोग को सही से नहीं दिया गया। उन्होंने इलेक्शन कमीशन को शिकायत दी थी, लेकिन कई सालों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। नीरज शर्मा की याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव के दौरान गोविंद सिंह ने जानबूझकर अपनी संपत्ति को छुपाया और गलत हलफनामा दिया। जब इस बारे में शिकायत की गई, तो इलेक्शन कमीशन (चुनाव आयोग) ने कोई सुनवाई नहीं की। इसके बाद शर्मा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट का याचिका खारिज करने से इंकार
कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी नीरज शर्मा द्वारा दायर नई याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इसे प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने से इंकार कर दिया है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा एवं न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष हुई। इस दौरान निर्वाचन आयोग और गोविंद सिंह राजपूत व ओर से याचिका की मेंटेनेबिलिटी की पर आपत्ति उठाई गई। अधिवक्ताओं ने दलील दी कि शिकायत पहले से निर्वाचन आयोग के समक्ष लंबित है, राज्य सरकार को पक्षकार नहीं बनाया गया है तथा यह याचिका जनहित याचिका के रूप में प्रस्तुत की गई है, जबकि मामला व्यक्ति विशेष से जुड़ा है। इसके साथ ही मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने का मौखिक आग्रह भी क्रिया गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन सभी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी प्रतिनिधित्व या शिकायत को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। यदि निर्वाचन आयोग शिकायत को सुनवाई योग्य नहीं मानता था, तो उसे समय रहते खारिज किया जाना चाहिए था। कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने के आग्रह को भी खारिज कर दिया।
अगली सुनवाई 9 जनवरी को संभावित
हाईकोर्ट ने नौरज शर्मा की इस नई याचिका को वर्ष 2025 में दायर पूर्व याचिका क्रमांक 36367/2025 के साथ संलग्न करते हुए कहा कि फिलहाल मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया जा रहा है। प्रकरण की अगली सुनवाई 9 जनवरी को संभावित बताई जा रही है। अगली सुनवाई में यह उम्मीद जताई जा रही है कि निर्वाचन आयोग को अब तक की गई कार्रवाई अथवा निर्णय न लेने के कारणों का विस्तृत विवरण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना पड़ सकता है।

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