
टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट का आदेश किया निरस्त
जबलपुर। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की युगलपीठ ने नकली नोटों से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि सजा निलंबन के मुद्दे पर अदालतों को उदार रुख दिखाना चाहिए। इसी के साथ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमे सजा के विरुद्ध दायर अपील सुनवाई के लिए मंजूर तो की गई थी, लेकिन सजा निलंबन की अंतरिम अर्जी निरस्त कर दी गई थी। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि निश्चित अवधि की सजा वाले मामलों में अपील लंबित रहने के दौरान सजा निलंबन पर उदार दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए, जब तक कि कोई असाधारण परिस्थिति न हो। कुल मिलाकर कारणरहित आदेश स्वीकार्य नहीं है।
मामला क्या था …………
नकली नोटों के साथ पकड़े गए खमरिया, जबलपुर निवासी सुखचैन चक्रवर्ती वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार गंगेले व अधिवक्ता रितु गंगेले ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि सुखचैन को सत्र न्यायालय, जबलपुर ने 19 सितम्बर, 2024 का दोषी पाते हुए सात वर्ष के कारावास और 100 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके विरुद्ध हाई कोर्ट में आपराधिक अपील दायर हुई। हाई कोर्ट की युगलपीठ में एकलपीठ ने 29 जनवरी, 2025 को सजा के विरुद्ध सुखचैन की अपील स्वीकार तो की, लेकिन सजा निलंबन की अंतरिम अर्जी निरस्त कर दी थी। इस पर यह अपील सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने तर्क सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि हाई कोर्ट का आदेश अस्पष्ट था और सजा निलंबन से संबंधित स्थापित विधिक सिद्धांतों का समुचित अनुपालन नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि जब अभियुक्त को निश्चित अवधि की सजा दी गई हो जैसा कि वर्तमान प्रकरण में अधिकतम सात वर्ष की सजा है, तब अपील लंबित रहने के दौरान सजा निलंबन पर उदारतापूर्वक विचार किया जाना चाहिए, जब तक कि कोई असाधारण परिस्थिति न हो। उक्त आधारों पर सुप्रीम कोर्ट ने अभियुक्त सुखचैन की अपील स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया तथा अभियुक्त को ट्रायल कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन ज़मानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। यह आदेश सजा निलंबन से संबंधित कानून के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि अपीलीय न्यायालयों को ऐसे मामलों में कारणयुक्त एवं विधि-सम्मत आदेश पारित करना अनिवार्य है।
