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फर्जी खातों से करोड़ों की निकासी, प्लॉटों में बदली सरकारी मदद—दलाल जेल में, अफसरों पर शिकंजा कसने के संकेत
भिंड । जिस संबल योजना को गरीब परिवारों की आर्थिक ढाल माना जाता है, वही भिंड नगर पालिका में भ्रष्टाचारियों के लिए कमाई की मशीन बन गई। करीब तीन करोड़ रुपये के महाघोटाले ने न सिर्फ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी उजागर कर दिया है कि योजनाओं की आड़ में किस तरह संगठित ‘लुटेरा नेटवर्क’ वर्षों तक सक्रिय रहा।
पुलिस जांच में सामने आया है कि संबल योजना के तत्कालीन प्रभारी रहे राजेंद्र सिंह चौहान इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड थे। तीन साल तक फरार रहने के बाद नवंबर में विदिशा से गिरफ्तारी—और वह भी क्रिकेट खेलते हुए—इस बात का संकेत है कि आरोपी को कानून का कोई खौफ नहीं था। पूछताछ में चौहान ने दलालों, खातों और लेन-देन की पूरी चेन खोल दी, जिसके बाद भिंड पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की।
सीएसपी निरंजन राजपूत के अनुसार, चौहान के इशारे पर प्रदीप और अरविंद सिंह नामक दो दलालों ने रिश्तेदारों व परिचितों के बैंक खातों का जाल बिछाया। फर्जी दस्तावेजों के सहारे संबल की राशि निकाली गई और सरकारी मदद सीधे निजी खातों में ट्रांसफर होती रही। जांच में यह भी चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इसी घोटाले की रकम से जामना और अंबेडकर नगर क्षेत्र में परिजनों के नाम पर दो प्लॉट खरीदे गए। पुलिस ने दोनों रजिस्ट्रियों को जब्त कर लिया है।
बुधवार को शहर से दोनों दलालों की गिरफ्तारी कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस का दावा है कि यह कार्रवाई सिर्फ ट्रेलर है—फिल्म अभी बाकी है। बैंक खातों, ट्रांजैक्शन ट्रेल और नगर पालिका के भीतर की भूमिका अब गहन जांच के दायरे में है।
शिकायतकर्ता सत्यप्रकाश शर्मा का कहना है कि यदि जांच ईमानदारी से आगे बढ़ी, तो नगर पालिका में दबे कई बड़े भ्रष्टाचार सामने आएंगे। उन्होंने लोकायुक्त और आर्थिक अपराध शाखा भोपाल में भी शिकायत दर्ज कराई है और मौजूदा सीएमओ यशवंत वर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यदि जांच समिति ने जांच सही तरीके से की तो सीएमओ यशवंत वर्मा को जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता।
यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि गरीबों के भरोसे की हत्या है। अब सवाल यह नहीं कि घोटाला हुआ या नहीं–सवाल यह है कि क्या कार्रवाई ऊपर तक पहुंचेगी या फिर संबल का सच फाइलों में दफन कर दिया जाएगा?

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