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दोषमुक्ति को चुनौती देने वाली अपील
जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने अपने एक आदेश में साफ किया कि दहेज हत्या प्रकरण में क्रूरता साबित करना आवश्यक है। यदि अभियोजन पक्ष के गवाह क्रूरता साबित नहीं कर पाते है तो आरोपित को सजा से दंडित नहीं किया जा सकता है। लिहाजा, दोषमुक्ति के आदेश को चुनौती देने वाली अपील निरस्त की जाती है। दरअसल, जिला अदालत, डिंडौरी ने अनावेदक को दोषमुक्त करार दे दिया था। जिसके विरुद्ध राज्य शासन की ओर से अपील दायर की गई थी। प्रकरण के अनुसार सुनीता से रणजीत सिंह से जून, 2020 में प्रेम विवाह किया था। शादी के एक साल के अंदर ही पति के साथ हुए कथित झगड़े के बाद उसने 29 अप्रैल, 2021 को आत्महत्या करने खुद को आग लगा ली थी और अगले दिन उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने आरोपित पति के दहेज हत्या का प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया था। डिंडौरी न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए आरोपित पति को दोषमुक्त कर दिया था। हाई कोर्ट ने पाया कि अभियोजन की गवाह तथा मृतिका की बहन ने स्वीकार किया कि दोनों में प्रेम विवाह किया था। आरोपित की ओर से दहेज की मांग नहीं की गई थी। ससुराल पक्ष द्वारा आरोपित को आटो सुधरवाने के लिए 16 हजार रुपये दिए गए थे। मृतिका की मां ने भी इसी प्रकार के बयान दिए थे। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि सुनीता विवाह से पूर्व लगभग नौ माह तक आरोपित के साथ लव रिलेशनशिप में थी। वह दोनों के विवाह से खुश नहीं थी। उसके भाई ने भी अपने बयान में कहा था कि नौकरी के कारण वह भोपाल में था और वह बहन की शादी में शामिल नहीं हुआ था। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके समाज में पारिवारिक विवाद के लिए पंचायत बुलाई जाती थी। शादी के बाद से विवाद के संबंध में कोई पंचायत नहीं बुलाई गई थीं और पुलिस में भी शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार मौत का कारण हार्ट फेलियर था। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि एक बार जब अभियोजन के गवाहों ने दहेज या दहेज की मांग से जुड़ी क्रूरता साबित नहीं की तो आरोपी को सजा नहीं हो पाती। जिला न्यायालय ने अपने फैसले में कोई गलती नहीं की है।

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