मृत आरक्षक सहित 15 लोगों पर एफआईआर, आईपीएस स्तर तक जांच की आहट

जबलपुर। जबलपुर स्थित विशेष सशस्त्र बल छटवीं बटालियन (एसएएफ) में अब तक का सबसे बड़ा टीए बिल घोटाला सामने आया है| इस मामलें में मृतक आरक्षक सहित 9 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई| शुरुआती दौर में यह घोटाला 2 करोड़ रुपए का माना जा रहा था, लंबी जांच के बाद यह घोटाला बढ़कर साढ़े 3 करोड़ तक पहुंच गया| शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों ने पूरे पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा 5 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है और जांच की जद में आईपीएस स्तर के अधिकारियों के आने की भी आशंका जताई जा रही है।
इस मामलें में रांझी थाने में एएसआई सहित कुल 15 कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें एक मृत आरक्षक का नाम भी शामिल है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सभी आरोपियों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर संदिग्ध पाई गई है।
2018-19 से चल रहा था खेल…….
इस संगठित घोटाले की नींव साल 2018-19 में रखी गई थी, लेकिन इसका खुलासा नवंबर 2025 में हुआ। जांच में सामने आया कि टीए शाखा में पदस्थ एलडीसी बाबू सत्यम शर्मा ने फर्जी यात्रा बिलों के जरिए सरकारी खजाने को लगातार नुकसान पहुंचाया। कागजों में आरक्षकों को जिले से बाहर ड्यूटी पर दिखाया जाता था, जबकि वास्तविकता में वे जबलपुर में ही पदस्थ रहते थे। स्टेट फाइनेंस इंटेलिजेंस सेल की रिपोर्ट ने पूरे मामले की गंभीरता उजागर कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक, कई आरक्षकों के बैंक खातों में उनकी कुल सैलरी से 200 गुना तक अधिक रकम जमा पाई गई। 12 आरक्षकों के खातों में सिर्फ टीए बिलों के जरिए 10-10 लाख रुपये जमा हुए। आरक्षक अभिषेक झारिया के खाते में 582 ट्रांजैक्शन के जरिए 55 लाख रुपये डाले गए, जबकि उसकी पूरी सेवा अवधि की सैलरी केवल 26 लाख रुपये थी। नीतेश कुमार पटेल सहित अन्य कर्मचारियों को भी वेतन से कई गुना अधिक यात्रा भत्ता भुगतान किया गया।
पूरी तरह संगठित सिस्टम…..
जांच में सामने आया कि घोटाले का मास्टरमाइंड सत्यम शर्मा भुगतान से पहले आने वाला ओटीपी खुद लेता था। रकम ट्रांसफर होते ही वह अधिकांश राशि नकद में वापस ले लेता था। खुद के खाते में पैसा न डालकर वह सहयोगियों के खातों का इस्तेमाल करता था और बदले में उन्हें 50 प्रतिशत हिस्सेदारी का लालच देता था, ताकि जांच से बचा जा सके।
निलंबन के बाद आत्महत्या …
मामला उजागर होते ही पुलिस विभाग ने आरोपियों को निलंबित कर दिया। निलंबन और जांच के दबाव में आकर कथित तौर पर आरक्षक अभिषेक झारिया ने 12 नवंबर को ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील हो गया। इस मामलें में एक ओर चौंकाने वाली बात यह है कि आरक्षक अभिषेक झारिया की ट्रेन के नीचे आने से मौत की बात कही जा रही है, लेकिन कई सवाल अब भी अनसुलझे है| अभी तक ट्रेन से कटे अभिषेक की मुंडी और उसका मोबाइल बरामद नहीं हुआ है|
मुख्य आरोपी अभी भी फरार…………
वहीं घोटाले का मुख्य आरोपी सत्यम शर्मा अपनी शादी का कार्ड सामने आने के बाद से फरार है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
दो स्तरों पर जारी है जांच …
इस बहुचर्चित घोटाले की जांच फिलहाल दो स्तरों पर चल रही है. एक जांच एसएएफ कमांडेंट सिद्धार्थ चौधरी की तीन सदस्यीय विभागीय जांच टीम कर रही है. वहीं कलेक्टर द्वारा गठित छह सदस्यीय विशेष कमेटी भी मामले की प्रशासनिक स्त्र पर जांच में जुटी है. अब तक 20 से अधिक आरक्षकों के बैंक खाते फ्रीज किए जा चुके हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, घोटाले की परतें खुलेंगी और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
प्रदेश में अपनी तरह का पहला मामला…..
यह घोटाला न सिर्फ जबलपुर बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में पुलिस विभाग के भीतर सामने आया अपनी तरह का पहला बड़ा टीए गबन माना जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि इतने वर्षों तक यह घोटाला चलता रहा और किसी भी स्तर पर ऑडिट या निगरानी क्यों नहीं हो पाई। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और क्या सचमुच यह मामला बड़े अफसरों तक पहुंच पाएगा या फिर निचले कर्मचारियों पर ही आकर थम जाएगा।
