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कोर्ट के आदेश के बाद झूंसी थाने में एफआईआर, शिष्य मुकुंदानंद व तीन अज्ञात भी नामजद
प्रयागराज। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों के कथित यौन शोषण के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। यह कार्रवाई प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत के आदेश के बाद की गई। झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर में उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और 2-3 अज्ञात व्यक्तियों को भी नामजद किया गया है। पुलिस ने मामला पॉक्सो एक्ट सहित संबंधित धाराओं में दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
थाना प्रभारी महेश मिश्रा ने मीडिया को बताया, कि अदालत के निर्देश मिलते ही शनिवार देर रात केस दर्ज कर लिया गया। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि आरोप गंभीर और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं तथा साक्ष्य संकलन के लिए पुलिस जांच आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जांच निष्पक्ष और स्वतंत्र हो तथा पीड़ितों की पहचान और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
शिकायत पर कोर्ट ने दिए थे एफआईआर के आदेश……..
यह मामला आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से दायर याचिका के बाद सामने आया। आशुतोष ब्रह्मचारी, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाते हैं। उन्होंने 8 फरवरी को विशेष पॉक्सो कोर्ट में शिकायत दाखिल की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि गुरुकुल की आड़ में नाबालिगों का उत्पीड़न किया गया। सुनवाई के दौरान दो नाबालिगों के बयान कैमरे के सामने दर्ज किए गए थे। अदालत ने 13 फरवरी को आदेश सुरक्षित रखने के बाद शनिवार को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि माघ मेला और महाकुंभ के दौरान आयोजित शिविर में दो नाबालिगों के साथ कई बार जबरन यौन शोषण किया गया और विरोध करने पर उन्हें धमकाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस में पहले तहरीर देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
शंकराचार्य ने आरोपों को निराधार बताया…….
कोर्ट के आदेश के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह एक बनावटी मामला है। उनका कहना है कि आशुतोष ब्रह्मचारी पूर्व में भी झूठे मुकदमे दर्ज कराने के आरोपी रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यह प्रकरण वैचारिक मतभेदों का परिणाम है और वह न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय की प्रक्रिया का सम्मान करते हुए वे जांच में सहयोग करेंगे और सत्य सामने आएगा।

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