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जबलपुर। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट सिहोरा अजय उईके की अदालत ने 19 फरवरी को आजाद चौक में दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प और पथराव की घटना के आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक सिहोरा के आजाद चौक स्थित दुर्गा मंदिर में आरती के दौरान मदीना मस्जिद से आई भीड़ ने तत्कालिक विवाद में पथराव , गालीगलौज व मारपीट कर दी। जय ज्योति समिति की ओर से अंकेश गुप्ता, आर्दश गुप्ता, रामजी गुप्ता, रितु बर्मन व अन्य की ओर से सिहोरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई, जिस पर पुलिस ने धार्मिक उन्माद व भावनाएं आहत करने सहित उपद्रव के मामलें में धारा 190,191(2),191(3),296 बी,115(2),298,324(2),299, 125, 351(3)बी०एन०एस० का अपराध कायम कर विवेचना में लिया| इस दौरान आरोपी साकिर मकरानी, ताहिर मकरानी, आबिद राईन, आशिक बावा, समीर खान, आसमानी भाईजान, फरदीन, शादाब, नौशाद, अब्दुल, इमरान शाह, जावेद राईन, ओवेद राईन, नाशीर अंसारी, अनवर राईन, राजा मकरानी, समीर मकरानी, छोटू अंसारी, अशरफ मकरानी, हप्पू मछली वाला, तनवीर राईन, मोहम्मद तौसीर, सोहेल शाह, अकरम शाह, मोहम्मद शिन्दबाज को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया|
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की ओर से सिहोरा न्यायालय में जमानत याचिकाएं प्रस्तुत की गई, जिन पर बुधवार को सुनवाई हुई | इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी अजय दुबे द्वारा उक्‍त जमानत आवेदन का सशक्‍त विरोध किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपियों द्वारा एक वर्ग विशेष की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गयी एवं पथराव किया गया जिसमें हिन्‍दू सामु‍दाय के कुछ लोग घायल हुये। यह आकस्मिक विवाद नहीं, बल्कि यह एक पूर्व नियोजित था। जमानत मिलने पर अभियुक्तों के द्वारा अभियोजन पक्ष के गवाहों को डराने धमकाने एवं साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ की प्रबल संभावना है। इस स्तर पर अभियुक्तगणों को जमानत का लाभ दिए जाने पर साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने एवं सार्वजनिक शांति भंग होने का गंभीर खतरा पैदा होगा। अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने जमानत याचिकाएं खारिज कर दी।

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