
दमोह। लीनेस मैत्री क्लब दमोह द्वारा होली के पावन पर्व पर “वृज की होली” उत्सव का आयोजन बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ किया गया। इस अवसर पर क्लब की सभी सदस्याएँ पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर शामिल हुईं, जिससे पूरे कार्यक्रम में वृंदावन की होली की मनमोहक झलक देखने को मिली। रंग, संगीत, नृत्य और हास्य-परिहास से भरपूर इस आयोजन ने सभी को होली की सांस्कृतिक परंपरा से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत होली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए की गई। वक्ताओं ने कहा कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे और आपसी सौहार्द का प्रतीक है। यह त्योहार हमें जीवन में मौजूद मनमुटाव और नकारात्मकता को भुलाकर रिश्तों को प्रेम और अपनत्व के रंगों से मजबूत बनाने का संदेश देता है। सदस्यों ने बताया कि जैसे रंगों की विविधता जीवन को सुंदर बनाती है, वैसे ही अलग-अलग विचारों और स्वभाव वाले लोगों के साथ प्रेमपूर्वक रहना ही सच्ची खुशी है।

इस दौरान होली के पौराणिक महत्व पर भी चर्चा की गई और इसे बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक बताया गया। आयोजन के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। सदस्याओं ने सभी को प्रेरित किया कि होली पर रासायनिक रंगों के बजाय प्राकृतिक और हर्बल रंगों का उपयोग करें, पानी की अनावश्यक बर्बादी से बचें और प्रकृति की सुरक्षा का संकल्प लें, ताकि त्योहार की खुशियों के साथ पर्यावरण भी सुरक्षित रह सके। कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण “यादों की होली” रहा, जिसमें क्लब की सदस्याओं ने अपने बचपन और जीवन से जुड़े होली के मजेदार और दिलचस्प किस्से साझा किए। किसी ने बचपन की शरारतें सुनाईं तो किसी ने परिवार और दोस्तों के साथ मनाई गई यादगार होली की बातें साझा कीं। इन यादों को सुनकर सभी के चेहरे पर मुस्कान खिल उठी और पूरा माहौल ठहाकों से गूंज उठा। इस अवसर पर पारंपरिक होली गीतों और नृत्य प्रस्तुतियों ने उत्सव में और भी रंग भर दिए। सभी सदस्याओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं और प्रेम, एकता तथा खुशियों का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने यह संकल्प लिया कि होली के इस पावन पर्व को जीवन में प्रेम, सकारात्मकता और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ मनाया जाएगा। हँसी-खुशी, अपनत्व और उल्लास से भरे इस आयोजन ने सभी के दिलों में होली की मधुर यादें और भी गहरी करी।
