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19 साल चली सुनवाई के बाद सीबीआई कोर्ट ने सुनाया फैसला
बैतूल। बैतूल जिले के मुलताई के पास स्थित चौथिया गांव में वर्ष 2007 में हुए पारदी दंपति हत्याकांड में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की विशेष अदालत ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने पूर्व मंत्री और विधायक सुखदेव पांसे और वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार सहित 14 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। यह फैसला घटना के लगभग 19 वर्ष बाद आया है। इस निर्णय से उन सभी आरोपियों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पिछले 19 वर्षों से लगातार भोपाल स्थित कोर्ट में पेशी पर जाना पड़ रहा था। फैसले को लेकर बैतूल जिले में लंबे समय से राजनीतिक सरगर्मी बनी हुई थी।
11 सितंबर 2007 को मुलताई के पास चौथिया ढाने में पारदी समाज की बस्ती में हिंसक घटना हुई थी। उस समय बड़ी भीड़ ने पारदी बस्ती पर हमला कर करीब 62 मकानों को आग के हवाले कर दिया था। घटना के बाद इलाके में काफी तनाव की स्थिति बन गई थी। मामले में पीडि़त पक्ष के आलस्य पारदी ने पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट होकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद 7 अगस्त 2009 को हाईकोर्ट ने पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। जांच के दौरान सीबीआई ने जबलपुर स्थित विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 82 लोगों को आरोपी बनाया गया। चार्जशीट में कुछ अधिकारियों और राजनेताओं के नाम भी शामिल किए गए थे और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी।
2018 में अदालत ने लिया था संज्ञान
मुलताई के ग्राम चौथिया में पारदी दंपत्ति बोन्द्रू हत्याकांड में वर्ष 2018 में एक अहम मोड़ आया था। उस समय सीबीआई सत्र न्यायालय जबलपुर की जज माया विश्वालाल ने मामले में प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने पर कांग्रेस के प्रदेश महासचिव और पूर्व विधायक सुखदेव पांसे, भाजपा के जिला पंचायत सदस्य राजा पवार, तत्कालीन एसडीओपी डीएस साकल्ले सहित आठ लोगों को आरोपी मानते हुए नोटिस जारी किया था।

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