निकाय अध्यक्षों के निर्वाचन के लिए नोटिफिकेशन जारी न करने के मामले में राज्य सरकार को हाई कोर्ट से फिर फटकार

ग्वालियर / भोपाल। नगर पालिका, नगर परिषद के अध्यक्षों के निर्वाचन के लिए नोटिफिकेशन जारी न करने के मामले में राज्य सरकार को हाई कोर्ट से फिर फटकार मिली है। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने नगर पालिका श्योपुर के अध्यक्ष पद से जुड़े मामले में राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि राज्य सरकार द्वारा मामले को बार-बार टालने की कोशिश बेंच हंटिंग(बाधा डालने) का संकेत देती है। अदालत ने कहा है कि राज्य सरकार और संबंधित पक्ष बार-बार सुनवाई टालने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि वह मामले की अंतिम सुनवाई जल्द करना चाहता है।
कोर्ट ने यह टिप्पणी एक अप्रैल को हुई नगर पालिका श्योपुर के अध्यक्ष पद से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान की है। नगर पालिका श्योपुर में चुनाव कराने के बाद नोटिफिकेशन को लेकर विवाद चल रहा है। विवाद यह है कि प्रदेश के सभी नगरपालिका और नगर परिषदों की तरह श्योपुर नगर पालिका के अध्यक्ष के चुनाव के बाद भी सरकार की ओर से निर्वाचन अधिसूचना जारी नहीं हुई। इसी आधार पर चुनाव को चुनौती दी गई थी। पहले चुनाव ट्रिब्यूनल ने याचिका को प्रिमैच्योर बताते हुए खारिज कर दिया था, लेकिन हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए कहा कि अधिसूचना आवश्यक है। इसके बाद राज्य सरकार ने अपने रुख में बदलाव किया, जिसे कोर्ट ने सोच-समझकर लिया गया बाद का फैसला बताया। न्यायाधीश जीएस अहलूवालिया की अदालत में चल रहे केस में हाई कोर्ट ने अपने सख्त रुख में यह स्पष्ट कर दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया में देरी या हेरफेर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी, जहां अंतिम निर्णय की दिशा तय हो सकती है।
राज्य सरकार की नीति न्याय प्रक्रिया में बाधा वाली
इस मामले में एक अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि राज्य सरकार का रुख बार-बार बदलना और सुनवाई टालना न्याय प्रक्रिया में बाधा (बेंच हंटिंग) है। कोर्ट ने यह भी कहा कि एडवोकेट जनरल की अनुपस्थिति को आधार बनाकर दो हफ्ते की स्थगन मांगना उचित नहीं है। अदालत के अनुसार यदि कोई व्यस्तता थी तो एक-दो दिन का समय मांगा जा सकता था, न कि दो हफ्तों का समय मांगना चाहिए।
जुलाई की सुनवाई में लिस्टेड होगा मामला
हाईकोर्ट ने अब इस मामले को 13 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तब तक कोई भी अर्जेंट हियरिंग या मेंशन मेमो स्वीकार नहीं किया जाएगा। अंतरिम आदेश (8 अक्टूबर 2025) अंतिम निर्णय तक जारी रहेगा। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने निर्वाचन का नोटिफिकेशन नहीं होने पर नगर परिषद अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार पर रोक लगा रखी है। इसके अलावा पानसेमल, नागदा, जावरा नगर परिषद अध्यक्षों के वित्तीय अधिकारों पर भी इसी कारण कोर्ट लगा चुका है।
