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अध्यक्ष पद पर नीतू परमार की जीत वैध करार

न्यायालय ने कहा – ट्रिब्यूनल ने यह तय करने की कोशिश की कि किसे समर्थन मिलना चाहिए
जबलपुर। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विवेक जैन की एकलपीठ ने प्रदेश के मुलताई नगर परिषद अध्यक्ष निवाचन के मामले में सुनवाई के बाद अपने फैसले में इलेक्शन ट्रिब्यूनल के आदेश को इस मत के साथ निरस्त कर दिया कि ट्रिब्यूनल ने कानून की सीमाओं को लांघते हुए “मोरल पुलिसिंग” की, जो न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ है। इसके साथ ही न्यायालय ने नीतू परमार की जीत को वैध ठहराते हुए उन्हें दोबारा अध्यक्ष पद संभालने की अनुमति दे दी।
गौरतलब हो कि वर्ष 2022 के मुलताई नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव में 15 पार्षदों ने मतदान किया जिसमें कांग्रेस समर्थित नीतू परमार को 9 वोट मिले जबकि भाजपा समर्थित वर्षा गाडेकर को 6 वोट मिले थे। यह चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से था, जिसमें जनता द्वारा चुने गए पार्षद ही अध्यक्ष का चुनाव करते हैं।
निवाचन के बाद सामने आए मामले में इलेक्शन ट्रिब्यूनल के फर्स्ट डिस्ट्रिक्ट जज, मुलताई ने 13 जून 2023 को 4 बैलेट पेपर पर कथित पहचान चिन्ह मान लिए और कांग्रेस पार्षदों के समर्थन को “भ्रष्ट आचरण” मानकर चुनी गई अध्यक्ष नीतू परमार का चुनाव रद्द करके नए चुनाव कराने के आदेश दिए थे। नीतू परमार की ओर से उक्त मामले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई जिस पर सुनवाई के दौरान आवेदिका की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल, अधिवक्ता एश्वर्य ननदानी तिवारी और आदित्य राज शुक्ला ने पक्ष रखा।
मामले में सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अध्यक्ष का चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं था। लिहाजा ऐसे में किसी भी पार्षद को अपनी पसंद से वोट देने का अधिकार है। इसे भ्रष्ट आचरण कहना कानून की गलत व्याख्या है। न्यायालय ने यह भी कहा कि ट्रिब्यूनल ने यह तय करने की कोशिश की कि किसे समर्थन मिलना चाहिए। ट्रिब्यूनल का यह रवैया न्यायिक दायरे से बाहर है,रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। ट्रिब्यूनल का निष्कर्ष “परवर्स” यानी तथ्य के विपरीत बताया गया। कुछ पार्षदों को पद दिए जाने के आधार पर भ्रष्टाचार मानना गलत है। यह आरोप मूल याचिका में भी नहीं था। एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि अगर विपक्षी दल के पार्षद ने वोट दिया, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे अवैध ठहराना लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। यदि पार्टी का अनुशासन टूटा है, तो कार्रवाई पार्टी का आंतरिक विषय है। इस मत के साथ उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने ट्रिब्यूनल का 13 जून 2023 का आदेश निरस्त कर नीतू परमार के चुनाव को वैध घोषित करते हुए उन्हें तुरंत अध्यक्ष पद संभालने की अनुमति प्रदान कर दी।

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