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बैतूल-भोपाल फोरलेन का मामले में एनएचएआई से स्टेटस रिपोर्ट तलब
जबलपुर। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा तथा’न्यायाधीश विनय सराफ की संयुक्तपीठ ने बैतूल-भोपाल फोरलेन परियोजना के मामले में सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि यदि सड़क किनारे बैरिकेड्स लगा दिए जाएंगे, तो टाइगर सड़क पार कैसे करेंगे ? न्यायालय ने उक्त बिंदु पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि 19.5 किलोमीटर के जंगल क्षेत्र में से 10.5 किलोमीटर हिस्से को ऊपर से (एलिवेटेड) ले जाने की सिफारिश पहले ही की जा चुकी है, फिर उसका पालन क्यों नहीं किया जा रहा ? इसके साथ ही मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली संयुक्तपीठ ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) से इस मामले में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश देकर प्रकरण पर अगली सुनवाई 24 अप्रैल को नियत कर दी।
उक्त मामला राष्ट्रीय राजमार्ग 46 (बैतूल-भोपाल फोरलेन) से जुड़ा है, जहां केसला-भौरा-बरेठा के घने जंगल क्षेत्र में सड़क निर्माण किया जा रहा है। अमरावती (महाराष्ट्र) निवासी वन्यजीव प्रेमी अद्वेत क्योले की ओर से 2021 में दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि फोरलेन निर्माण से वन्य जीवों का प्राकृतिक आवागमन बाधित होगा। टाइगर और अन्य जानवरों के जीवन पर खतरा बढ़ेगा। वन्य जीवों के सड़क पार करने के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ेगी।
उच्च न्यायालय ने याचिका पर 1 अप्रैल 2022 को सुनवाई करते हुए अपने अंतरिम आदेश के तहत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच चल रहे निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। इसके बाद 23 मार्च को भी न्यायालय ने निर्माण पर रोक को यथावत रखते हुए नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी और नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ के अधिकारियों को तलब किया था। सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “जैसे विकास कार्यों के कारण छत्तीसगढ़ के हाथियों ने मध्यप्रदेश की ओर रुख किया, वैसे ही टाइगर भी पलायन कर सकते हैं।” न्यायालय ने यह भी कहा कि“सड़क के नीचे बनाए जा रहे संकरे रास्ते टाइगर के लिए उपयुक्त नहीं हैं।”संयुक्तपीठ ने स्पष्ट किया कि टाइगर केवल वहीं रास्ता पार करता है जहां उसे सामने जंगल दिखाई देता है, इसलिए अंडरपास जैसी छोटी-छोटी संरचनाएं पर्याप्त नहीं हैं। इस मत के साथ न्यायालय ने एनएचएआई से मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली।

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