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गुवाहाटी । असम विधानसभा चुनाव में इस बार मतदान ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। राज्यभर में कई सीटों पर 80 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत से अधिक तक मतदान दर्ज किया गया है, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। यह केवल एक सामान्य चुनावी आंकड़ा नहीं, बल्कि राज्य के बदलते राजनीतिक वातावरण का संकेत भी माना जा रहा है, और कहीं ना कहीं मतदान प्रतिशत में वृद्धि सत्तासीन भाजपा के लिए चिंता के विषय है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार निचले असम और अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान का प्रतिशत 90 के पार पहुंच गया। जलेश्वर, मानकाचार, दलगांव और लाहरीघाट जैसी सीटों पर बड़ी संख्या में मतदाताओं ने मतदान किया। इतनी व्यापक भागीदारी को सामान्यतः जनता के भीतर किसी बड़े परिवर्तन की इच्छा के रूप में देखा जाता है।
इसके विपरीत, गुवाहाटी और आसपास के शहरी क्षेत्रों में मतदान अपेक्षाकृत कम रहा। दिसपुर, न्यू गुवाहाटी और गुवाहाटी केंद्रीय जैसी सीटों पर मतदान लगभग 70 से 75 प्रतिशत के बीच रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में कम मतदान सत्तारूढ़ दल के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
इस चुनाव की एक और महत्वपूर्ण विशेषता मतदान के समय में देखने को मिली। दोपहर के बाद, विशेषकर 3 बजे से 5 बजे के बीच, मतदान में अचानक तेज वृद्धि दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि बड़ी संख्या में महिलाएं, ग्रामीण मतदाता और निम्न आय वर्ग के लोग मतदान के लिए आगे आए।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जब चुनाव में ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाले वर्गों की भागीदारी इस स्तर तक बढ़ती है, तो इसे सामान्यतः “बदलाव के पक्ष में मतदान” माना जाता है।
इस बार के मतदान आंकड़ों को कई जानकार सत्ता के विरुद्ध रुझान के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि इस प्रकार का मतदान पैटर्न विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस और उसके सहयोगियों के लिए सकारात्मक संकेत देता है, जबकि सत्तारूढ़ दल के लिए यह चेतावनी हो सकता है।
हालांकि अंतिम स्थिति मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन इतना निश्चित है कि असम के मतदाताओं ने इस बार चुनाव को अत्यंत गंभीरता से लिया है।

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