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10 पुरुष याचिकाकर्ताओं को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने निर्देश

जबलपुर। हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने मध्य प्रदेश में नर्सिंग आफिसर भर्ती में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण को चुनौति देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुये 10 पुरुष याचिकाकार्ताओं को अंतरिम देते हुये भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिये हैं.
एमपी में नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण को चुनौती देने वाले याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 10 पुरुष याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार सहित कर्मचारी चयन मंडल ( ईएसबी) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद होगी। हालांकी कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है की भर्ती के परिणाम याचिका के अंतिम निर्णयाधीन होंगे.
याचिका पर सुनवाई करते हाईकोर्ट ने जबलपुर निवासी संतोष कुमार लोधी सहित 10 पुरुष याचिकाकर्ताओं को मेडिकल कॉलेजो में नर्सिंग ऑफिसर के विज्ञापित पदों पर आवेदन करने तथा भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग सहित मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पुरुष अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर हाल ही में जारी नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने कोर्ट को बताया कि कर्मचारी चयन मंडल के विज्ञापन ;नर्सिंग ऑफिसर एवं सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा-2026 में नर्सिंग ऑफिसर के पदों को 100 प्रतिशत केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इससे योग्य पुरुष अभ्यर्थी आवेदन करने से पूरी तरह वंचित हो गए हैं।
मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा (अराजपत्रित) सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2023 के तहत नर्सिंग ऑफिसर के पद के लिए कोई लिंग आधारित प्रतिबंध नहीं है। मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन में किया गया यह प्रावधान वैधानिक नियमों के विपरीत है। पुरुष और महिला दोनों एक ही पाठ्यक्रम में पढ़ते हैं और उनके पास समान योग्यता व पंजीकरण होता है। लिंग के आधार पर सार्वजनिक रोजगार से पूर्णत: बाहर करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन है। मांग है कि विज्ञापन के उस हिस्से को निरस्त किया जाए जो 100 प्रतिशत पदों को महिलाओं के लिए आरक्षित करता है ।

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