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आपराधिक अवमानना के मामले में हाई कोर्ट ही विचार करेगा

जबलपुर। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत व न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची की युगलपीठ ने विजयराधवगढ़, कटनी के भाजपा विधायक संजय पाठक द्वारा लंबित मामले के संबंध में हाई काेर्ट जज से संपर्क करने के मामले में विशेष अनुमति याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने स्वतंत्र कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि विधायक के विरुद्ध हाई कोर्ट द्वारा दर्ज किए गए आपराधिक अवमानना के प्रकरण में हाई कोर्ट ही विचार कर सकता है। इस मत के साथ सुप्रीम कोर्ट ने कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित को विशेष अनुमति याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया था कि विधायक संजय पाठक से संबंधित कंपनी के विरुद्ध अवैध खनन के मामले में हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने एक सितम्बर, 2025 को सुनवाई से इनकार कर दिया था। उन्होंने अपने आदेश में कहा था कि विधायक ने उससे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया। जिसके कारण वह सुनवाई से खुद को अगल कर रहे हैं। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को प्रशासनिक स्तर पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने का निर्देश भी दिया था। याचिका में कहा गया था कि विधायक का यह कृत्य न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने व गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। न्यायिक कार्य में हस्तक्षेप करना आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है। हाई कोर्ट ने दो अप्रैल को याचिका का निराकरण करते हुए मामले को संज्ञान में लेते हुए भाजपा विधायक के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिया था। इसी मामले में याचिकाकर्ता ने विशेष अनुमति याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। सोमवार को सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के समक्ष जाने की छूट देकर याचिकाकर्ता को विशेष अनुमति याचिका वापस लेने की मंजूरी दे दी।

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