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मामले की अगली सुनवाई 18 जून को
जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने बीना विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दलबदल मामले के निराकरण में देरी पर नाराजगी जताई। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि मामले की विधिवत सुनवाई विधानसभा स्पीकर द्वारा की जा रही है। उमंग सिंघार द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच प्रक्रिया जारी है। इस पर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जब दलबदल मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने 90 दिनों के भीतर निर्णय देने की समय सीमा तय की है, तो 720 दिनों में भी अभ्यावेदन का निराकरण क्यों नहीं हो पाया। कोर्ट ने महाधिवक्ता से कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन स्पीकर के संज्ञान में लाएं। वहीं उमंग सिंघार के वकील ने भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 90 दिन की समय सीमा का पालन सुनिश्चित किए जाने की मांग की। मामले की अगली सुनवाई 18 जून को होगी। दरअसल, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की तरफ से हाई कोर्ट में याचिका के जरिए दल-बदल कानून के तहत बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे का निर्वाचन शून्य करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि उन्होंने 30 जून, 2024 को विधानसभा अध्यक्ष तोमर के समक्ष इस मामले में याचिका दायर की थी। लेकिन निर्धारित 90 दिन गुजरने के बावजूद कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई। लिहाजा, हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।

याचिका में कहा गया है कि विधायक निर्मला सप्रे पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त थीं। लोकसभा चुनाव के दौरान पांच मई, 2024 को राहतगढ़ में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के कार्यक्रम में मंच पर पहुंची थीं। याचिकाकर्ता का कहना है कि कांग्रेस विधायक सप्रे भाजपा में शामिल हो चुकी हैं। इसके बावजूद उन्होंने विधायक पद से त्यागपत्र नहीं दिया है। दलबदल कानून के प्रकाश में उनका यह रवैया गैर कानूनी है। इसलिए सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए।

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