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मानसा कोर्ट की मान को सख्त चेतावनी
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। मानसा की एक स्थानीय अदालत ने मानहानि के पुराने मामले में बार-बार अनुपस्थित रहने पर मुख्यमंत्री के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) राजिंदर सिंह नागपाल ने स्पष्ट किया है कि यदि मुख्यमंत्री 1 मई को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए हैं, तब उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होगी।
दरअसल यह मामला साल 2019 का है, जब आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक नाजर सिंह मानशाहिया ने मान और कुछ मीडियाकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। मनासा कोर्ट ने उल्लेख किया कि अक्टूबर 2022 से अब तक मुख्यमंत्री एक बार भी अदालत में पेश नहीं हुए हैं। हालांकि शुरुआत में उन्हें आवश्यक जमानत बांड जमा करने पर जमानत दे दी गई थी, लेकिन तब से मामले की कार्यवाही उनकी अनुपस्थिति के कारण रुकी हुई है।
हालिया सुनवाई के दौरान, सीएम मान के वकील ने चंडीगढ़ में एक महत्वपूर्ण बैठक का हवाला देकर व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट की मांग की थी। कोर्ट ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी का आचरण और रवैया न्यायालय की कार्यवाही के प्रति उनकी गंभीरता की कमी को दर्शाता है। पिछली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की उनकी अर्जी भी खारिज कर दी गई थी और उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया था।
अदालत ने मंगलवार की सुनवाई के लिए छूट दे दी, लेकिन इस अंतिम चेतावनी करार दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु दर्ज किए। मुख्यमंत्री को 1 मई को कोर्ट के समक्ष उपस्थित होने का आखिरी मौका दिया गया है। यदि वे अगली तारीख पर पेश नहीं होते हैं, तो उनकी जमानत रद्द कर दी जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कानून के तहत दंडात्मक उपाय अपनाए जाएंगे। मनासा कोर्ट ने मुख्यमंत्री के वकील को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई पर आरोपी की उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित की जाए। अब सभी की नजरें 1 मई की सुनवाई पर टिकी हैं कि क्या मुख्यमंत्री कोर्ट में पेश होते हैं या मामला कोई नया मोड़ लेता है।

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