
हाईकोर्ट ने कहा – पात्रता उसी दिन देखी जाएगी जो विज्ञापन में कट-ऑफ डेट के रूप में तय है
जबलपुर। उच्च न्यायालय ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में शामिल होने की मांग से संबंधित सभी 49 याचिकाएं इस मत के साथ निरस्त कर दीं कि जिस उम्मीदवार के पास आवेदन की अंतिम तिथि तक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं है, उसे चयन प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। इसके साथ ही उक्त मामले में पूर्व में दिए गए अंतरिम आदेश भी समाप्त कर दिए गए।
क्या था मामला……….
याचिकाकर्ता असिस्टेंट प्रोफेसर पद के अभ्यर्थी थे। उनका कहना था कि वे अपने-अपने विषयों में अंतिम सेमेस्टर या अंतिम वर्ष के छात्र थे और चयन प्रक्रिया पूरी होने तक पोस्ट ग्रेजुएशन या पीएचडी की योग्यता हासिल कर । इसलिए उन्हें परीक्षा और इंटरव्यू में शामिल होने की अनुमति दी जाए। वहीं भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट शर्त थी कि उम्मीदवार के पास आवश्यक योग्यता आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि तक होना चाहिए। पहले यह तिथि 26 मार्च 2025 थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 10 अप्रैल 2025 कर दिया गया था।
अपने आदेश में न्यायालय ने कहा कि यह निर्विवाद तथ्य है कि किसी भी याचिकाकर्ता के पास 10 अप्रैल 2025 तक आवश्यक योग्यता नहीं थी। ऐसे में वे पात्र नहीं माने जा सकते। केवल इस आधार पर मौका नहीं दिया जा सकता कि भविष्य में वे डिग्री प्राप्त कर लेंगे। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया अनुमान या संभावना के आधार पर नहीं चल सकती। पात्रता उसी दिन देखी जाएगी जो विज्ञापन में कट-ऑफ डेट के रूप में तय की गई है। न्यायालय ने कहा कि यदि अपात्र उम्मीदवारों को केवल इस उम्मीद पर शामिल कर लिया जाए कि वे बाद में योग्य हो जाएंगे, तो पहले से पात्र उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित होंगे। सीमित पदों पर ऐसे उम्मीदवारों की भागीदारी से वास्तविक योग्य अभ्यर्थियों का नुकसान हो सकता है।
उक्त मामले में कुछ याचिकाकर्ताओं को पहले अंतरिम आदेश के तहत लिखित परीक्षा में बैठने की अनुमति मिली थी। अब वे इंटरव्यू में शामिल होने की मांग कर रहे थे। न्यायालय ने कहा कि अंतरिम आदेश से किसी अपात्र उम्मीदवार को स्थायी अधिकार नहीं मिल जाता। यदि मूल रूप से पात्रता नहीं है, तो परीक्षा में शामिल होने का कोई लाभ नहीं दिया जा सकता। इसके साथ ही याचिकाओं में कोई मेरिट नहीं है। इसलिए सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं और पूर्व में जारी अंतरिम आदेश समाप्त किए जाते हैं।
