
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
-न्यायपालिका से हस्तक्षेप की मांग; कांग्रेस ने कहा- चुनावी लोकतंत्र की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट की भूमिका अहम
नई दिल्ली। बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों का केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर हमला तेज हो गया है। 23 विपक्षी दलों और एक निर्दलीय सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को पत्र लिखकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, एसआईआर प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चिंता जताई है। विपक्ष ने न्यायपालिका से हस्तक्षेप कर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की अपील की है।
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने शुक्रवार को 28 जून को भेजे गए इस पत्र को सार्वजनिक करते हुए कहा कि देश के चुनावी लोकतंत्र के सामने गंभीर चुनौतियां हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यपालिका पर संविधान की मूल भावना को कमजोर करने के आरोप लग रहे हैं और ऐसे समय में लोकतंत्र की रक्षा करना न्यायपालिका की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
वेणुगोपाल ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आधारशिला हैं तथा सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि चुनाव न केवल निष्पक्ष हों बल्कि निष्पक्ष दिखाई भी दें। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता के हित में इस पत्र को सार्वजनिक किया गया है, ताकि चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास कायम रहे।
पत्र पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, द्रमुक नेता तिरुचि शिवा सहित 23 विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों और एक निर्दलीय सांसद के हस्ताक्षर हैं।
पत्र में विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि हाल के वर्षों में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं और उसके कुछ फैसले सत्तारूढ़ दल के पक्ष में दिखाई देते हैं। आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी चिंता व्यक्त की गई है। बिहार में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने दावा किया है कि इसे पर्याप्त आधार के बिना शुरू किया गया तथा इससे मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की आशंका है। पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रक्रिया को जल्दबाजी में लागू किया गया, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं।
विपक्ष ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान अधिकारियों के तबादले और मतदाता सूची से नाम हटाने जैसी प्रक्रियाओं ने निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाए। पत्र के माध्यम से विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की न्यायिक समीक्षा कराने, एसआईआर प्रक्रिया की वैधता और निष्पक्षता की जांच कराने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की मांग की है।
