टीएमसी के 20 और उद्धव गुट के 6 बागी सांसदों को अलग बैठने की मंजूरी

नई दिल्ली। संसद के मौजूदा मानसून सत्र में लोकसभा की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। दरअसल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के छह बागी सांसदों को अलग समूह के रूप में मान्यता देते हुए सदन में अलग बैठने की अनुमति दे दी है। सोमवार 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने वाले मानसून सत्र में ये सभी सांसद अपने नए दलों के साथ सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे।
टीएमसी के 20 सांसदों ने 15 जून को पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया था। इससे पहले 8 जून को इन सांसदों ने केंद्र की एनडीए सरकार को समर्थन देने की घोषणा की थी। पूर्व टीएमसी नेता काकोली घोष दस्तीदार ने बताया था कि सांसदों के हस्ताक्षरयुक्त पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दिए गए थे। एनसीपीआई पश्चिम बंगाल में पंजीकृत राजनीतिक दल है, जिसने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भी अपने उम्मीदवार उतारे थे।
वहीं, महाराष्ट्र में 22 जून को उद्धव ठाकरे की शिवसेना में एक और बड़ी टूट हुई थी। लोकसभा के नौ सांसदों में से छह सांसद पार्टी छोड़कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए थे। इसके बाद लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या सात से बढ़कर 13 हो गई। मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एकनाथ शिंदे ने इसे पार्टी के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया था।
इन दोनों घटनाक्रमों से लोकसभा में एनडीए का संख्या बल और मजबूत होने की संभावना है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 240 सीटें जीती थीं और सहयोगी दलों के साथ एनडीए का आंकड़ा 292 तक पहुंचा था। अब टीएमसी और उद्धव गुट के बागी सांसदों के समर्थन से सरकार दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुंच सकती है। माना जा रहा है कि इससे सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों, विशेषकर संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्तावों पर रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।
