एफआईआर दर्ज होने के पांच साल बाद, 2019 में अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी हुई

भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस के तत्कालीन एआईजी रहे अनिल मिश्रा को दुष्कर्म और नाबालिग से गलत हरकत के मामले में जयपुर की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। अदालत ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दी है, जबकि पीडि़ता की नाबालिग बेटी के साथ गलत हरकत करने के मामले में तीन वर्ष के कारावास और जुर्माने से भी दंडित किया है। अभियोजन ने मामले में कई पुलिस अधिकारियों को गवाह बनाया। फैसले में आरोपी के पुलिस विभाग में विभिन्न पदों पर रहने और एआईजी स्तर के अधिकारी के रूप में कार्य करने से जुड़े दस्तावेजों का भी उल्लेख है। पीड़िता का आरोप था कि आरोपी ने अपने पुलिस पद और प्रभाव का इस्तेमाल उसके पति से जुड़े मामलों और उसके खिलाफ चल रहे मुकदमों में किया। एफआईआर दर्ज होने के पांच साल बाद, 2019 में अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी हुई। इसके बाद मध्यप्रदेश सरकार ने उसे बर्खास्त कर दिया।
विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने अपने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए पीडि़ता का विश्वास तोड़ा और उसे मदद का झांसा देकर अपना शिकार बनाया। अदालत ने इसे विश्वास और अधिकार के गंभीर दुरुपयोग का मामला माना। मामले के अनुसार, वर्ष 2012 में पीडि़ता के पति के खिलाफ सीहोर में एक मामला दर्ज हुआ था। इसी मामले में मदद की उम्मीद से पीडि़ता के पति ने अपनी पत्नी को तत्कालीन एआईजी अनिल मिश्रा से मिलने भेजा। मार्च 2012 में भोपाल में दोनों की मुलाकात हुई, जहां आरोपी ने कानूनी सहायता का भरोसा दिलाया। आरोप है कि मदद के बहाने अनिल मिश्रा ने पीडि़ता को ऑफिसर्स मैस बुलाया और वहां उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद आरोपी ने पीडि़ता को जोधपुर और मुंबई सहित अन्य शहरों में भी बुलाया।अदालत ने कहा कि ऐसे व्यक्ति के प्रति नरमी नहीं बरती जा सकती। आरोपी पुलिस का वरिष्ठ अधिकारी था और लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसी पर थी। उसने अपने पद और हैसियत का दुरुपयोग किया।
पीडि़ता की नाबालिग बेटी के साथ भी की गलत हरकत…
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ने पीडि़ता से आर्थिक लेन-देन भी कराया और उसके खाते में पैसे ट्रांसफर करवाए। मामले में एक और गंभीर आरोप यह था कि अप्रैल 2014 में आरोपी ने पीडि़ता की नाबालिग बेटी के साथ भी गलत हरकत की। इस संबंध में दर्ज प्रकरण में पॉक्सो एक्ट के तहत सुनवाई हुई और अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए तीन वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
