
बेंगलुरु । कर्नाटक हाई कोर्ट ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े और उनके परिवार द्वारा संचालित ट्रस्ट को बेंगलुरु विकास प्राधिकरण की जमीन आवंटित किए जाने में कथित अनियमितताओं की जांच से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने आरोपों की जांच करने के लिए गठित स्पेशल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। यह मामला 8,001 वर्ग मीटर की बेशकीमती जमीन के आवंटन से जुड़ा है।
इस मामले में शिकायतकर्ता ने पुलिस जांच की मांग की थी। उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विशेष अदालत के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें अदालत ने खुद जांच शुरू करने का फैसला किया था। मामला बेंगलुरु विकास प्राधिकरण की ओर से सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को दी गई 8,001 वर्ग मीटर की बेशकीमती जमीन के आवंटन से जुड़ा है। 18 अगस्त के अपने फैसले में हाई कोर्ट ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की अदालत ने खुद जांच शुरू करके गलती की। शिकायतकर्ता विजयराघव मराठे ने पुलिस जांच की मांग करते समय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया था। इसके बावजूद निचली अदालत ने मामले में खुद जांच शुरू कर दी। जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने बीएनएसएस की धारा 223 के तहत अदालत द्वारा जांच के लिए विशेष अदालत के 11 अगस्त के आदेश को रद्द करते हुए फैसला सुनाया, उपचार योग्य दोष के लिए उपचार की आवश्यकता होती है, न कि वैधानिक प्रक्रिया को ही छोडऩे की।
