सीजेआई सूर्यकांत ने कहा – सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद छात्र के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत कैसे हुई

नई दिल्ली/नोएडा । छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई किए जाने पर बुधवार को शीर्ष अदालत ने नोएडा के एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट को कड़ी फटकार लगाई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने मामला उठने पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किसी छात्र को प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर इस तरह से डराया या परेशान नहीं किया जा सकता।
मामला नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट आरके सिसोदिया की ओर से छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी किए गए नोटिस से जुड़ा है। 4 सितंबर को जारी नोटिस में छात्र से छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपए का निजी बॉन्ड और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने 6 सितंबर को नोटिस वापस ले लिया था। इसके बावजूद बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान छात्र के वकील की ओर से यह मुद्दा उठाया गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नोटिस कैसे जारी हुआ
सीनियर एडवोकेट विश्वजीत भट्टाचार्य ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही छात्र विरोध प्रदर्शनों से संबंधित एफआईआर रद्द कर चुका है और भविष्य में छात्रों के खिलाफ जबरन कार्रवाई पर रोक लगा चुका है। इसके बावजूद नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने छात्र को नोटिस जारी कर दिया। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है तो कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद छात्र के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई कैसे की जा सकती है। सीजेआई ने भरोसा दिलाया कि मामले में जिला मजिस्ट्रेट से जवाब मांगा जाएगा।
