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जबलपुर । हाईकोर्ट ने प्रदेश के 189 सूटेबल पाए गए नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को बड़ी राहत दी है। इन कॉलेजों के छात्रों द्वारा दी गई परीक्षाओं के परिणाम अब घोषित किए जा सकेंगे। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को राज्य सरकार और मध्यप्रदेश नर्सिंग रेग्युलेटरी काउंसिल की ओर से दायर अर्जियों पर विस्तृत आदेश सुनाते हुए रिजल्ट घोषित करने की अनुमति दे दी। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सूटेबल पाए गए सभी नर्सिंग कॉलेज अब इस मामले के दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे।
मध्यप्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और संचालन से जुड़े विवाद के बीच 189 कॉलेजों को सूटेबल पाए जाने के बाद उनके छात्रों ने परीक्षाएं दी थीं। इन परीक्षाओं के परिणाम घोषित किए जाने को लेकर हाईकोर्ट के समक्ष सरकार और नर्सिंग काउंसिल की ओर से अर्जियां दाखिल की गई थीं। मंगलवार को इन अर्जियों पर सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने छात्रों के हित में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। अब संबंधित कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों के परीक्षा परिणाम घोषित किए जा सकेंगे।
फैकल्टी डुप्लीकेसी पर भरना होगा जुर्माना ……..
डिवीज़न बेंच ने कॉलेजों में फैकल्टी डुप्लीकेसी पर भी कड़ा रुख अपनाया है। फैकल्टी डुप्लीकेसी, यानी एक ही प्रोफेसर का अलग-अलग कॉलेज में पढ़ाना। बेंच ने कहा है कि जो भी नर्सिंग कॉलेज फैकल्टी डुप्लीकेसी में दोषी पाए गए, उन्हें हर एक फैकल्टी पर 2 लाख की दर से जुर्माना अदा करना होगा। इसके अलावा हर कॉलेज को एक लाख रूपए और जुर्माने के रूप में भरना होंगे।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि जिन 189 नर्सिंग कॉलेजों को सूटेबल पाया गया है, वे अब इस मामले के दायरे से बाहर रहेंगे। इससे इन कॉलेजों के विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम और आगे की शैक्षणिक प्रक्रिया को लेकर बड़ी राहत मिली है।
2022 की जनहित याचिका से जुड़ा है मामला……..
यह पूरा मामला लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन द्वारा वर्ष 2022 में दायर की गई जनहित याचिका से जुड़ा है। नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता, उपयुक्तता और शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया चल रही है। मंगलवार को इसी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार और नर्सिंग काउंसिल की अर्जियों पर हाईकोर्ट ने अपना विस्तृत आदेश सुनाया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक बगरेचा और विशाल बघेल ने पक्ष रखा। वहीं मध्यप्रदेश नर्सिंग रेग्युलेटरी काउंसिल की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह तथा उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी और सीबीआई की ओर से अधिवक्ता विक्रम सिंह ने दलीलें पेश कीं।

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