
16 में से 5 आरोपियों की मौत …………जांच और तारीख पर तारीख का खेल
भोपाल । प्रदेश के सबसे चर्चित व्यापम घोटाले से जुड़े करीब 18 साल पुराने मामले में अब मूल दस्तावेजों पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि घोटाले से संबंधित महत्वपूर्ण मूल दस्तावेज दीमक लगने से खराब हो गए हैं। ऐसे में अब अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों की फोटो कॉपी के आधार पर केस आगे बढ़ाने की स्वीकृति दी है।
व्यापम घोटाला मध्य प्रदेश में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में चर्चा में आया था। मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया वर्षों से चल रही है। सीबीआई ने भी इस मामले की जांच की। लंबे समय के दौरान इस प्रकरण से जुड़े पांच आरोपियों की मौत भी हो चुकी है। इससे मामले की सुनवाई और साक्ष्यों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मूल दस्तावेजों के खराब होने के बाद अब अभियोजन पक्ष के सामने उपलब्ध प्रतियों और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर मामले को आगे बढ़ाने की चुनौती है। अदालत यह भी देखेगी कि फोटो कॉपी किए गए दस्तावेज साक्ष्य के रूप में किस हद तक स्वीकार किए जा सकते हैं। उनकी प्रमाणिकता कैसे स्थापित होगी।
18 साल पुराने इस मामले में दस्तावेजों का नष्ट होना केवल रिकॉर्ड प्रबंधन का मामला नहीं है, बल्कि इससे न्यायिक प्रक्रिया की गति और साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठता है। व्यापम घोटाले की जांच में हजारों उम्मीदवारों, दलालों और अधिकारियों के नाम सामने आए थे। अब मूल रिकॉर्ड के क्षतिग्रस्त होने से इस बहुचर्चित घोटाले की न्यायिक प्रक्रिया एक नई चुनौती के रूप में सामने है। 16 में से पांच आरोपियों की तो मौत हो चुकी है। जब तक मामले का फैसला आएगा तब तक कितने बचेंगे कहना मुश्किल है।
