राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत सुरक्षा का हवाला, सूचना आयोग का रिकॉर्ड जारी करने का आदेश रद्द

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से संबंधित भारतीय वायुसेना के उड़ान रिकॉर्ड सार्वजनिक करने के केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए वायुसेना के सूचना देने से इनकार करने के फैसले को सही ठहराया।
न्यायमूर्ति अमित महाजन ने अपने एक फैसले में कहा, कि ऐसे रिकॉर्ड में संवेदनशील जानकारियां हो सकती हैं, जिनके सार्वजनिक होने से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। मामला पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं से संबंधित रिकॉर्ड मांगे जाने से जुड़ा था। दरअसल सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश के. बत्रा ने जून 2018 में सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन दाखिल कर अप्रैल 2013 के बाद प्रधानमंत्री की भारतीय वायुसेना के विमानों से हुई विदेश यात्राओं के रिकॉर्ड मांगे थे। उनका उद्देश्य इन यात्राओं में शामिल गैर-सरकारी व्यक्तियों पर हुए सार्वजनिक खर्च की जानकारी प्राप्त करना था। भारतीय वायुसेना ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मामला केंद्रीय सूचना आयोग के पास पहुंचा। आयोग ने संवेदनशील जानकारियां हटाकर रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। वायुसेना ने इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।
नाम हटाने से भी सुरक्षा जोखिम खत्म नहीं……
सुनवाई के दौरान वायुसेना की ओर से दलील दी गई कि उड़ान रिकॉर्ड में यात्रियों, विमान के कर्मचारियों और विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के कर्मियों से संबंधित संवेदनशील विवरण हो सकते हैं। एजेंसी के अनुसार, केवल नाम हटाने से जानकारी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती। दूसरी सार्वजनिक जानकारियों के साथ मिलान करने पर भी यात्रा कार्यक्रम और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विवरण सामने आ सकते हैं। हाईकोर्ट ने वायुसेना की इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों में सक्षम एजेंसियों के सुरक्षा आकलन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, केवल इस आधार पर कि यात्रा में सार्वजनिक धन खर्च हुआ है, ऐसी जानकारी जारी करना उचित नहीं होगा, यदि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा या प्रधानमंत्री की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
