Spread the love

13 करोड़ वोटरों के नाम हटाने वाले चुनाव आयोग से पूछे सवाल….

करीम नगर। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) अभियान के तहत देश भर में 13 करोड़ से ज्यादा वोटरों के नाम हटाए जाने को लेकर जारी भारी विवाद के बीच, भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) का एक नया रुख सामने आया है। चुनाव आयोग ने आरटीआई (सूचना का अधिकार) के तहत उस सॉफ्टवेयर, ऐप या एआई टूल का नाम और संस्करण बताने से साफ इनकार कर दिया है, जिसका इस्तेमाल वोटर लिस्ट की गड़बड़ियों को पकड़ने में किया गया था। आयोग ने तर्क दिया है कि यह जानकारी कमर्शियल कॉन्फिडेंस, ट्रेड सीक्रेट और आईपी से जुड़ी है और आरटीआई कानून की धारा 8(1)(डी) के तहत इसे छूट प्राप्त है।
यह आरटीआई आवेदन तेलंगाना के करीमनगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एम. ए. मुजीब अय्यूब की तरफ से दाखिल किया गया था। उन्होंने चुनाव आयोग से कई तीखे सवाल पूछे थे, जिनमें वोटर डेटा में गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर या एआई प्लेटफॉर्म का नाम, क्या यह सिस्टम नाम हटाने के लिए ऑटोमेटिकली फ्लैग करता है और किसी वैध मतदाता का नाम गलती से न कटे इसके लिए क्या सुरक्षा इंतजाम हैं, साथ ही फ्लैग की गई गड़बड़ियों की समीक्षा कौन सा अधिकारी करता है, शामिल थे। 16 अक्टूबर को दिए अपने आधिकारिक जवाब में, चुनाव आयोग ने धारा 8(1)(डी) का हवाला देते हुए कहा कि सॉफ्टवेयर का नाम या संस्करण उजागर करने से किसी थर्ड पार्टी की प्रतिस्पर्धी स्थिति को नुकसान पहुंच सकता है। यह पूछे जाने पर कि नाम काटने की समीक्षा कौन करता है, आयोग ने धारा 8(1)(जी) का हवाला दिया, जो किसी व्यक्ति के जीवन या शारीरिक सुरक्षा को खतरे में डालने वाली जानकारी को रोकने से जुड़ी है। ईसीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि एसआईआर के लिए कोई नया सॉफ्टवेयर नहीं खरीदा गया है और जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 की धारा 13बी के तहत, संबंधित विधानसभा क्षेत्र का निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी ही तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर नाम जोड़ने या हटाने का वैधानिक अधिकारी है।
आरटीआई के इस जवाब पर भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ. पी. रावत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि यह एक कानूनी मामला है और आवेदक को सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष प्रथम अपील दाखिल करनी चाहिए, ताकि चुनाव आयोग जिन सवालों के जवाब देने से बच रहा है, उनके जवाब मांगे जा सकें। एसआईआर प्रक्रिया के तहत देश भर में 130 मिलियन (13 करोड़) से ज्यादा मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं, जिसको लेकर राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि चुनाव आयुक्त एस. एस. संधू और विवेक जोशी ने नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 मौकों पर मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर लिखित असहमति दर्ज कराई थी और कैबिनेट सचिव तक को पत्र लिखा था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *