
वाशिंगटन। अमेरिका में 2024 के राष्ट्रपति पद के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को वोट देने वाले दक्षिण एशियाई अमेरिकी मतदाताओं में से एक-चौथाई अब आगामी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन करने को तैयार हैं। एक संगठन ‘इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट’ द्वारा कराए गए एक नए सर्वेक्षण में यह महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। सर्वें में सामने आया हैं कि जिन दक्षिण एशियाई अमेरिकी मतदाताओं ने पूर्व में ट्रंप को वोट दिया था, उसमें 67 प्रतिशत अभी भी रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन करते हैं। हालांकि, 25 प्रतिशत मतदाताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे इस बार डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले है। इसके विपरीत, जिन मतदाताओं ने 2024 के चुनाव में कमला हैरिस को अपना वोट दिया था, उसमें से 96 प्रतिशत आगामी चुनावों में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में ही मतदान करने वाले हैं। इस सर्वेक्षण में 800 पंजीकृत दक्षिण एशियाई मतदाताओं को शामिल किया गया था, जिसमें से 87 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी थे। शेष 13 प्रतिशत मतदाता पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव, अफगानिस्तान और म्यांमा के अलावा कंबोडिया के खमेर समुदाय से संबंधित थे। मतदाताओं ने जीवनयापन की लागत (65 प्रतिशत), स्वास्थ्य सेवा (53 प्रतिशत), रोजगार और वेतन (33 प्रतिशत), तथा शिक्षा (28 प्रतिशत) को मध्यावधि चुनावों के प्रमुख मुद्दों के रूप में पहचाना है।
ये सर्वेक्षण नतीजे तब सामने आए हैं जब टेक्सास सहित कई राज्यों में समय से पहले मतदान शुरू हो चुका है। टेक्सास में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालारिको का मुकाबला ट्रंप समर्थित रिपब्लिकन केन पैक्सटन से है, और दोनों के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है। इस बदलाव का एक व्यक्तिगत उदाहरण 21 वर्षीय भारतीय-अमेरिकी वसंत भट्ट हैं, जिन्होंने पूर्व में रिपब्लिकन नेता सीनेटर टेड क्रूज के 2024 के चुनाव प्रचार अभियान में प्रशिक्षु के रूप में काम किया था। भट्ट ने बताया कि उन्होंने जेम्स टालारिको को वोट दिया है। उन्होंने लिखा, दूसरी पीढ़ी का भारतीय-अमेरिकी होने के नाते, मैं विदेशी मूल के लोगों के प्रति नफरत, नस्ली द्वेष और अपनी पहचान पर लगातार बढ़ते खुले हमलों से बेहद दुखी हूं। सर्वेक्षण में भेदभाव को लेकर गहरी चिंताएं भी सामने आईं। इसमें 90 प्रतिशत पंजीकृत मतदाताओं ने कहा कि उन्होंने स्वयं भेदभाव का सामना किया है या वे किसी इसतरह के व्यक्ति को जानते हैं जिसे इसका सामना करना पड़ा है। इनमें से 48 प्रतिशत ने सीधे तौर पर अपने व्यक्तिगत भेदभाव के अनुभवों का उल्लेख किया। इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट’ के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने कहा, इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि हमारे समुदाय के जिन लोगों ने पहले ट्रंप को वोट दिया था, उनमें से एक-चौथाई अब डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों को वोट देने की योजना बना रहे हैं। पटेल ने कहा कि यह समुदाय चुनाव में हार-जीत का अंतर तय कर सकता है, और उनका संगठन ऐसे हर मतदाता तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है।
