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पुल निर्माण के फाइनल बिल में 33 लाख की हेराफेरी…………एमबी बुक की गायब, दस्तावेजो में की छेड़छाड़

सिंगरौली। सिंगरौली में म्यार नदी पुल निर्माण के फाइनल बिल में हेराफेरी किये जाने की शिकायत को ईओडब्ल्यू ने खुलासा किया है। जॉच में 7.37 लाख के बिल को 40.91 लाख करने, एमबी नंबर 605 गायब करने और 16.78 लाख की पेनल्टी से बचने की साजिश के आरोप में पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन इंजीनियरों और ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार सिंगरौली जिले में पुल निर्माण के नाम पर सरकारी राशि में हेराफेरी और दस्तावेजों में कूटरचना की गई है। चाचर से कुहुनिया मार्ग पर म्यार नदी में बने पुल के फाइनल बिल में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की रीवा इकाई ने शिकायत के सत्यापन के बाद एफआईआर दर्ज की है। जांच में सामने आया कि पुल निर्माण के लिए स्वीकृत अंतिम देयक 7 लाख 37 हजार 861 रुपये था, जिसे कथित तौर पर कूटरचना कर बढ़ाकर 40 लाख 91 हजार 300 रुपये कर दिया गया। इस पूरे मामले में माप पुस्तिका गायब करने, दस्तावेजों में काट-छांट और पेनल्टी से बचने के लिए कथित आपराधिक साजिश रचने के आरोप हैं।

फाइनल बिल में 7.37 लाख की जगह बनाया 40.91 लाख का बिल
जांच में खुलासा हुआ की म्यार नदी पुल और पहुंच मार्ग निर्माण का ठेका मेसर्स विजय कुमार मिश्रा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, रीवा को दिया गया था। इसके लिए 5 फरवरी 2016 को अनुबंध निष्पादित हुआ था।परियोजना की मूल संविदा लागत 574.32 लाख रुपये थी। अनुबंध के मुताबिक निर्माण कार्य 18 महीने में यानी 4 अप्रैल 2018 तक पूरा होना था। लेकिन ठेकेदार ने निर्धारित समय पर काम पूरा नहीं किया और करीब चार महीने की देरी से 31 अगस्त 2018 को निर्माण कार्य पूर्ण किया।इसके बाद जनवरी 2019 में तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी सुशील कुमार मिश्रा ने 7,37,861 रुपये का अंतिम देयक भुगतान के लिए प्रस्तुत किया था।

16.78 लाख रुपये की पेनल्टी से बचने के लिए रची गई साजिश
ऑडिटर ने निर्माण कार्य में देरी, टेस्ट रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराने और अन्य अनियमितताओं के आधार पर कुल 16,78,437 रुपये की कटौती निर्धारित की थी।आरोप है कि इतनी बड़ी पेनल्टी और कटौती से बचने के लिए तत्कालीन एसडीओ सुशील कुमार मिश्रा ने कार्यालय से निर्माण कार्य से संबंधित माप पुस्तिकाएं वापस प्राप्त कीं। इसके बाद ठेकेदार और तत्कालीन उपयंत्री चंद्रशेखर तिवारी के साथ मिलीभगत कर कथित तौर पर दस्तावेजों में हेराफेरी की गई। जांच एजेंसी के अनुसार इसका उद्देश्य पेनल्टी की राशि को शून्य करना और शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाकर अनुचित लाभ हासिल करना था।

एमबी नंबर 605 गायब, दो अन्य माप पुस्तिकाओं में काट-छांट
इस मामले में सबसे गंभीर बात निर्माण कार्य से जुड़े महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों के गायब होने की है। ईओडब्ल्यू की पड़ताल में पाया गया कि माप पुस्तिका क्रमांक 605 को कथित तौर पर गायब कर दिया गया।माप पुस्तिका क्रमांक 606 में ओवरराइटिंग और काट-छांट की गई।माप पुस्तिका क्रमांक 734 में भी कथित तौर पर बदलाव किए गए।इन दस्तावेजों के आधार पर 1 नवंबर 2018 की तारीख का संशोधित फाइनल बिल तैयार किया गया।इस कथित फर्जी बिल में 7,37,861 रुपये की जगह 40,91,300 रुपये की राशि दर्शाई गई थी।

इन आरोपियो पर कसा शिंकजा
शिकायत की जॉच के बाद ईओडब्ल्यू रीवा ने सुशील कुमार मिश्रा, तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ), चंद्रशेखर तिवारी, तत्कालीन उपयंत्री, लोक निर्माण विभाग सेतु निर्माण उप संभाग, सीधी
मेसर्स विजय कुमार मिश्रा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, रीवा, संबंधित संविदाकार के खिलाफ धारा 409, 420, 467, 468, 471 और 120-बी के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओ में मामला दर्ज किया है।

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