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50 हजार का था इनाम

दमोह। दमोह में पदस्थ रहे पूर्व कलेक्टर और रिटायर्ड आईएएस राकेश अग्रवाल पिता किशनचंद अग्रवाल (70) की उनके घर में ही हत्या किए जाने की सनसनी खेज घटना में हत्या के फरार आरोपी केयर टेकर वरूण पिता राज कुमार वालमिकी (27) निवासी आशा कोलोनी, तहसील नाभा जिला पटियाला,पंजाब एवं 126-एफ लखन पुर कॉलोनी शास्त्रीपुरम आगरा (यूपी) को पुलिस आखिरकार कड़ी मशक्कत के बाद आगरा के मथुरा रोड से दबोच लिया है। आरोपी कचरा बैग लिए हुए नजर आया तब टीम ने उसे घेराबंदी करते हुए दबोच लिया। आरोपी को लेकर टीम फौरन ही भोपाल के लिये रवाना हुई यहॉ मंगलवार सुबह करीब 5 बजे मुगलिया छाप के नजदीक आरोपी वरुण द्वारा पिस्टल छीनकर भागने का प्रयास किया गया। उसे शॉर्ट एनकाउंटर के बाद पकड़ा गया। उसके पैर में पुलिस की गोली लगने के बाद उसे इलाज के लिये हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अग्रवाल के डांटने से नाराज था। आरोपी को रिमांड पर लेकर घटना के संबध में विस्तृत पूछताछ लगातार जारी है । दो दिन पहले रखे केयर टेकर ने धारदार हथियार से की थी हत्या
राकेश अग्रवाल अपनी पत्नी के साथ सूरजनगर स्थित मकान में रहते थे। बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे उनकी पत्नी ने नींद खुलने के बाद मॉर्निंग वॉक पर जाने के लिए घर का मुख्य दरवाजा खोलने की कोशिश की तो वह बाहर से बंद मिला। स्थिति संदिग्ध लगने पर वह राकेश अग्रवाल के कमरे की तरफ गई। कमरे के भीतर अंदर फर्श पर राकेश अग्रवाल का शव जमीन पर पड़ा नजर आया। उनके गले पर धारदार हथियार से किए गए हमले के निशान थे। पुलिस जांच में हत्या के साथ-साथ घर में आग लगाने की कोशिश के संकेत भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि किचन में एलपीजी सिलेंडर का पाइप निकला हुआ था और पूरे घर में गैस फैल गई थी। राकेश अग्रवाल ने 28 सितंबर को ही पंजाब की एक एजेंसी के जरिए से केयर टेकर वरुण कुमार को काम पर रखा था। हत्या के बाद से वह गायब हो गया और उसका सामान भी घर में नहीं मिलने से पुलिस का शक उस पर गहरा गया।

गिरफ्तारी के समय मोबाइल नहीं मिला
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के समय वरुण के पास मोबाइल फोन या कोई अन्य सामान नहीं मिला। केयर टेकर उपलब्ध कराने वाली एजेंसी और उसके वेरिफिकेशन की भी जांच की गई है। फिलहाल, एजेंसी की कोई ठोस आपराधिक भूमिका सामने नहीं आई है।

कबाड़ा बेचा फुटपाथ पर सोया
पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद वरुण लगातार ठिकाने बदल रहा था। वह एक-दो दिन से ज्यादा किसी जगह नहीं रुकता था। ग्वालियर से आगरा, मथुरा और वृंदावन होते हुए दिल्ली पहुंचा। इसके बाद हरिद्वार, ऋषिकेश, नैनीताल और मनाली तक गया। इस दौरान उसने बस, ट्रेन और ट्रकों से सफर किया। उसके पास कोई स्थायी ठिकाना नहीं था। वह कबाड़ और प्लास्टिक की बोतलें बीनकर बेचता था। रात फुटपाथ पर गुजारता था। शुरुआती पूछताछ में वरुण उसने बताया है की अग्रवाल अक्सर उस पर चिल्लाते थे। इसी गुस्से में उसने हत्या की बात कही है। घर में एलपीजी सिलेंडर का पाइप खुला छोड़ने के बारे में भी आरोपी ने गुस्से में ऐसा करने की बात कही।

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