2021 में निचली अदालत ने साक्ष्यों के अभाव का हवाला देकर सभी आरोपों से बरी कर दिया था

नई दिल्ली । 13 साल पुराने बहुचर्चित यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराए गए एक पूर्व पत्रकार तरुण तेजपाल को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने उन्हें सुनाई गई 10 साल के कठोर कारावास की सजा पर रोक लगाने और जमानत देने से जुड़ी याचिका को खारिज किया है। दो जजों की पीठ ने स्पष्ट किया कि वे इस स्तर पर सजा निलंबित करने के पक्ष में नहीं हैं।
यह मामला वर्ष 2013 का है, जब गोवा के एक पांच सितारा होटल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एक युवा सहकर्मी ने पूर्व संपादक तरुण तेजपाल पर होटल की लिफ्ट के भीतर यौन हमला करने और पद का दुरुपयोग कर उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था। मामले में पुलिस ने जांच के बाद करीब 3000 पन्नों का विस्तृत आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया था, जिसमें गलत तरीके से बंधक बनाने, यौन उत्पीड़न और अधिकार के दुरुपयोग से जुड़ी कई गंभीर धाराएं शामिल थीं।
मामले की लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से दर्जनों गवाहों के बयान दर्ज कराए थे। हालांकि, वर्ष 2021 में निचली अदालत ने साक्ष्यों के अभाव का हवाला देकर आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने निचली अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर पूर्व संपादक को मामले में दोषी पाया और उन्हें दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
