सरकार के सभी दावे सवालों के घेरे में…….नकली नोट छपना भी बंद नहीं हुए
काला धन खत्म करने के नाम पर नोटबंदी, 99.3 प्रतिशत बंद पुराने नोट बैंकों में लोटे

नई दिल्ली । 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद करने की घोषणा करते हुए इसे काले धन, भ्रष्टाचार, आतंकवाद और जाली नोटों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बताया था। नोटबंदी के 10 साल पूरे होने जा रहे हैं। देश की जनता से 10 साल पहले कहा गया था, इस फैसले से देश की अर्थव्यवस्था बेहतर होगी। काले धन पर निर्णायक प्रहार होगा। नकली नोट और तस्करी तथा माफियाओं पर चोट होगी। नोट बंदी के परिणामों ने सरकार के इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। विपक्षी दल इसे एक बड़ा घोटाला भी बता रहे हैं।
नोटबंदी के समय लगभग 15.44 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा चलन में थी। सरकार को उम्मीद थी, काले धन के रूप में जमा बड़ी राशि बैंकों में वापस नहीं आएगी। इससे सरकार को आर्थिक लाभ होगा। भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 15.31 लाख करोड़ रुपये के प्रतिबंधित नोट बेंकों मे वापस आ गए। करीब 99.3 प्रतिशत मुद्रा बैंकिंग व्यवस्था में लौट आई। केवल लगभग 10,720 करोड़ रुपये वापस नहीं आए। नोटबंदी का जो निर्णय लिया गया था। उसकी जानकारी मंत्रिमंडल को भी नहीं दी गई थी। हजारों करोड़ों रुपए नए नोट छापने में खर्च करने पड़े। उसके बाद भी नकली मुद्रा का चलन रुकने के स्थान पर और बढ़ गया। जिस तरह की अफरा-तफरी मची थी। उसमें सैकड़ो लोगों की जान चली गई थी। छोटे बड़े उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हुए थे। देश में जो काले धन का प्रवाह था। वह नोटबंदी में बिना टैक्स दिए काला धन व्यवस्था में शामिल हो गया। जिसके कारण इसको सबसे बड़ा घोटाला भी बताया जाने लगा है।
