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डिजिटलीकरण से अंजान भारतीय बुजुर्ग कई परेशानियों का कर रहे सामना
नई दिल्ली । बुजुर्गों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी) प्राप्त करना अब आसान नहीं रहा है। यह बुजुर्गों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि जो महिलायें स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करतीं और फीचर फोन पर निर्भर हैं, उनके लिए सरकारी एप्लिकेशन को डाउनलोड कर डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र प्राप्त करना मुश्किल हो रहा है। इसी प्रकार एक बुजुर्ग ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि उनका राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) से जुड़ा स्मार्टफोन उनके बेटे के पास रहता है जो दूसरे शहर में है। इस कारण ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) उनके बेटे के नंबर पर आता है, जिससे वे प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते और बिना प्रमाण पत्र के लौट जाते हैं। इसी तरह एक बुजुर्ग ने बताया कि उन्होंने कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) जाने का विकल्प चुना, वहां उनसे सवाल पूछा गया कि क्या आपने दो बार शादी की है? ऐसे कई बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है जो अभी भी डिजिटल और कनेक्टेड इकोसिस्टम का हिस्सा नहीं हैं और डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण प्रमाणपत्र प्राप्त करने में समस्याओं का सामना कर रहे हैं। सरकार ने एक नवंबर से देशभर में डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है, जिसमें पेंशनभोगियों को फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक का इस्तेमाल करके प्रमाणीकरण करने की सुविधा दी जा रही है। इस पहल के तहत 1.8 लाख से अधिक पेंशनभोगियों ने पहले ही दिन अपने डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र प्राप्त किए हैं। हालांकि यह डिजिटलीकरण बहुत से पेंशनभोगियों के लिए सरल हो सकता है, जिनके पास डिजिटल कौशल और स्मार्टफोन हैं, लेकिन जिनके पास तकनीकी ज्ञान नहीं है या जो डिजिटल तंत्र से अनजान हैं, उनके लिए यह चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है
800 शहरों मं चल रहा डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र का अभियान
इस अभियान के तहत नवंबर महीने के अंत तक देशभर के 800 शहरों और जिलों में यह प्रक्रिया पूरी होगी। कार्मिक मंत्रालय के अनुसार, यह अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान है, जिसका उद्देश्य पेंशनभोगियों को और अधिक डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है।डीएलसी प्राप्त करने के लिए, पेंशनभोगी को अपने स्मार्टफोन के कैमरे का इस्तेमाल करते हुए चेहरे का स्कैन करवाना होता है। आधार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (जैसे चेहरे, उंगली और आईरिस प्रमाणीकरण) का भी विकल्प है, जिससे प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाती है। जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है, वे निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर, पेंशन वितरण बैंकों, डाकघरों या नामित सरकारी कार्यालयों में जाकर डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं।

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