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एक्ट मे सरकार करें संशोधन,
इन्दौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की डबल बेंच ने जनहित याचिकाओं की सुनवाई करते दिए महत्वपूर्ण निर्णय में सरकार को मोटर व्हीकल एक्ट के तहत स्कूल बसों के लिए विशेष प्रावधान करने के साथ इनके पालन की जिम्मेदारी भी तय करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्कूल बसों के संदर्भ मे सरकार को यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान नियम ट्रांसपोर्ट व्हीकल के है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एमपी मोटर व्हीकल एक्ट-1994 में स्कूल बस रजिस्ट्रेशन, संचालन व प्रबंधन के लिए नियमों का प्रावधान किया जाए।
बता दें कि इंदौर में हुए डीपीएस बस हादसे में हुई स्कूल बच्चों और बस ड्राइवर की मौत के बाद विविध जनहित याचिकाएं हाइकोर्ट में दायर की गई थी। इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई करते हाईकोर्ट की डबल बेंच ने स्कूल व शैक्षणिक संस्थानों की बसों के लिए अहम आदेश जारी कर आरटीओ, डीएसपी-सीएसपी ट्रैफिक को इन गाइडलाइन का सख्ती से पालन करवाने के निर्देश देते कहा है कि कोर्ट ने स्कूल बस और ऑटो के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है। साथ ही मप्र शासन को आदेश दिए हैं कि वह मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन करे। जब तक ऐसा नहीं होता यह गाइडलाइन लागू रहेगी। और इसके पालन कराने की जिम्मेदारी संबंधित जिले के आरटीओ और ट्रैफिक सीएसपी, डीसीपी की होगी। वहीं पीएस स्कूल शिक्षा विभाग, संबंधित जिले के कलेक्टर, एसपी इस मामले में ध्यान देंगे कि इनका पालन हो और इन गाइडलाइन को लेकर जागरूकता फैलाई जा सके। याचिकाकर्ताओं की ओर पैरवी एडवोकेट मनीष यादव ने की। उनके अनुसार हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा स्कूल बस को लेकर जारी की गई गाइडलाइन से कई अहम बिंदु ले मप्र शासन से कहा है कि वह भी मोटर व्हीकल एक्ट 1994 में इस तरह के बदलाव करें। साथ ही कोर्ट ने स्कूल बसों के संचालन हेतु अहम गाइडलाइन जारी की है जो कि इस प्रकार है।

स्कूल बस 12 साल से ज्यादा पुरानी नहीं हो।

बस पीले कलर की होगी, इसमें स्कूल बस लिखा होगा।

खिड़कियों पर ग्रिल लगेगी, इसमें पर्दे और फिल्म नहीं चलेगी।

ड्राइवर पांच साल का अनुभवी हो और परमानेंट लाइसेंस धारक हो।

ड्राइवर ने एक साल में दो और इससे ज्यादा ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन नहीं किया हो।

ड्राइवर ओवर स्पीड व ड्रिंक एंड ड्राइव मामले में एक से ज्यादा पकड़ा जाए तो उसे नहीं रखा जाए

इमरजेंसी डोर राइट साइड हो, बस सीट के नीचे बैग रखने की जगह हो। प्रेशर हॉर्न नहीं होगा।

अनुबंधित बसों के पास मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार फिटनेस प्रमाण पत्र होना चाहिए।

बसों में बीमा, परमिट, पीयूसी व टैक्स रसीद रखी जाए।
डीपीएस स्कूल बस हादसे के बाद लगी इन जनहित याचिकाओं में बस दुर्घटना में मरने वालों और घायलों को उचित मुआवजा दिए जाने के साथ प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई थी। जिस पर हाईकोर्ट ने कहा कि मुआवजे का मुद्दा जनहित याचिका में नहीं उठाया जा सकता। जहां तक प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की बात है, तो उन पर पहले से ही मामला दर्ज था, इसलिए इन दो बिंदुओं पर विचार नहीं किया जा रहा है।

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