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भोपाल। एमपी कैबिनेट ने किसानों और विद्युत कंपनी को बड़ी राहत दी है। मोहन यादव कैबिनेट ने घाटे से जूझ रही विद्युत वितरण कंपनियों की आर्थिक स्थिति सुधारने को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने तय किया है कि आरडीएसएस योजना के अंतर्गत 6 हजार करोड़ रुपए से अधिक का राज्य अंश कंपनियों को लोन के बदले अंश पूंजी के रूप में दिया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि विद्युत वितरण कंपनियों का ऋण और ब्याज का भार कम होगा।साथ ही 8376 करोड़ रुपए की लागत से प्रदेश के सभी जिलों में स्मार्ट मीटर लगाने के काम में तेजी आएगी। इसके साथ ही करीब दस हजार करोड़ रुपए की लागत से वितरण प्रणाली में तकनीकी और कमर्शियल लॉस रोकने का काम भी कम्पनियां कर सकेंगी। सरकार ने तय किया है कि केंद्रांश के रूप में काटी गई एसजीएसटी की राशि भी विद्युत वितरण कंपनियों को अंश पूंजी के रूप में दी जाएगी। इससे विद्युत कंपनियों में सुधार के काम शुरू हो सकेंगे। ऊर्जा विभाग बिजली चोरी रोकन और घाटा कम करने का काम इससे कर सकेगा।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार शाम को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में प्रदेश में उपार्जित धान की मिलिंग के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन और अपग्रेडेशन राशि की स्वीकृति दी है। निर्णय अनुसार मिलिंग राशि 10 रूपये प्रति क्विंटल और प्रोत्साहन राशि 50 रूपये प्रति क्विंटल प्रदाय की जायेगी। साथ ही 20 % परिदान एफ.सी.आई को करने पर 40 रूपये और 40 % परिदान एफ.सी.आई को करने पर 120 रूपये प्रति क्विंटल अपग्रेडेशन राशि प्रदाय की जायेगी। इससे किसानों से उपार्जित धान की मिलिंग में तेजी आयेगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं अंतर्गत चावल की आपूर्ति सुनिश्चित किये जाने के साथ राज्य की आवश्यकता के अतिरिक्त अतिशेष चावल की मात्रा को केंद्रीय पूल में त्वरित गति से परिदान किया जायेगा।
मंत्रि-परिषद द्वारा भारत सरकार द्वारा जारी रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के अंतर्गत विद्युत वितरण कम्पनियों को राज्यांश 40% राशि लगभग 6 हजार करोड़ रूपये ऋण के स्थान पर अंशपूंजी/अनुदान के रूप में प्रदान करने की स्वीकृति दी गयी है। निर्णय अनुसार राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों को वितरण अधोसंरचना के उन्नयन, वितरण हानियों में कमी तथा वितरण प्रणाली सुदृढीकरण एवं आधुनिकीकरण से संबंधित बुनियादी अधोसंरचना के निर्माण/विकास कार्यों के लिए राज्यांश की राशि ऋण के स्थान पर राज्य शासन द्‌वारा अंश पूंजी के रूप में प्रदान की जायेगी। योजनांतर्गत वितरण कंपनियों को अ‌द्यतन ऋण के रूप में दिये गये राज्यांश को भी अंश पूंजी में परिवर्तित किया जायेगा। योजनांतर्गत केन्द्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि भी राज्य शासन ‌द्वारा वितरण कंपनियों को अनुदान के रूप में उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे प्रदेश में स्थापित होने वाले स्मार्ट मीटर के कार्य में तेजी आयेगी।
उल्लेखनीय है कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण व विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति के उ‌द्देश्य से वित्तीय रूप से साध्य एवं परिचालन में दक्ष वितरण क्षेत्र विकसित करने के लिए रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) लागू की गयी है। योजना में केन्द्र सरकार ‌द्वारा विद्युत वितरण कंपनियों को प्री-पेड स्मार्ट मीटर व सिस्टम मीटरिंग के लिए 15% राशि और विद्युत अधोसंरचनात्मक विकास के लिए 60% राशि अनुदान के रूप में प्रदान किये जाने का प्रावधान है। शेष 40 प्रतिशत राशि राज्य शासन द्वारा अंश पूंजी के रूप में प्रदान की जायेगी।
मंत्रि-परिषद द्वारा केन्द्र प्रवर्तित योजना प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पी.एम. उषा) के संचालन की सैद्धांतिक सहमति दी गयी है। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, द्वारा वर्ष 2013 से राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) चरण 1.0 एवं रूसा चरण 2.0 केंद्र प्रवर्तित योजना के रूप में लागू कर प्रारम्भ की गई थी। योजना में प्रदेश के उच्च शैक्षणिक संस्थानों को चरणबद्ध तरीके से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। पी.एम. उषा योजना को 4 घटकों पर केन्द्रित किया गया है। जिसमें बहुसंकायी शिक्षा एवं शोध विश्र्वविद्यालय, विश्र्वविद्यालय के सुदृढ़ीकरण के लिए अनुदान, महाविद्यालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए अनुदान और लैंगिक समावेशिता एवं साम्यता पहल शामिल है।

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