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इन्दौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की डिवीजन बेंच ने पेट्रोल और डीजल पंप आवंटन में अनियमितताओं का आरोप लगाते दायर की गई दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते उन्हें अनावश्यक बताते खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 20 हजार रूपए की कॉस्ट लगाई है।कॉस्ट की राशि स्टेट लीगल एड सर्विसेस इंदौर खाते में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। हाइकोर्ट में दायर इन याचिकाओं में नायरा एनर्जी लिमिटेड एवं इंडियन ऑयल कार्पोरेशन द्वारा धार जिले में स्टेट हाई वे पर खोले गए दो पेट्रोल एवं डीजल पंप रिटेल आउटलेट के आवंटन को चुनौती दी गई थी। ये दोनों जनहित याचिकाएं तुलसीराम कसानिया और राधेश्याम कटारिया जो धार जिले के स्थानीय रहवासी हैं इनके द्वारा लगाईं गई थी। याचिकाकर्ताओं ने सरकारी स्कूल के पास और तय गाइड लाइन के खिलाफ इन्हें अनुमति दिए जाने का आरोप लगाते कोर्ट को दाखिल अपनी याचिका में कहा था कि धार जिले के सरदारपुर तहसील के राजोद ग्राम में स्टेट हाई वे पर ये आउटलेट सचिन जैन और भंवरलाल को आवंटित किये गये थे। केंद्र तथा राज्य सरकार एवं पेट्रोलियम कंपनियों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कि धार जिले के सरदारपुर तहसील के राजोद ग्राम में स्टेट हाई वे पर ये आउटलेट खोले जाने के इनके खोले जाने हेतु विज्ञापन जारी किए गए थे। और आवंटन की सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद सचिन जैन और भंवरलाल को इन्हें आवंटित किया गया था। कोर्ट को यह भी बताया कि कलेक्टर सहित अन्य सभी सक्षम ऑथोरिटी की एनओसी के बाद ही यह आवंटन किया गया है, जिनमे सुरक्षा के साथ अन्य तय मानकों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। सभी पक्षों के तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने जनहित याचिका खारिज कर याचिकाकर्ता पर कास्ट भी लगाई।

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