बुरहानपुर के केले के रेशे से निर्मित टोपी की लंदन में बढ़ी मांग

इन्दौर। प्रदेश सरकार की नवाचारी पहल रंग ला रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में उत्पादित सामग्री को देश सहित विदेश में पहचान दिलाने के प्रयासों को ताकत मिल रही है। बुरहानपुर में उत्पादित केले के रेशे से निर्मित टोपी इन दिनों लंदन में बुरहानपुर जिले को पहचान दिला रही है।
बुरहानपुर का केला देश के अलावा विदेशों में भी पहुँच रहा है। यहां केले के तने से रेशा निकालकर बड़ी ही खूबसूरती के साथ टोपी तैयार की जा रही है जो सात समन्दर पार लंदन तक अपनी पहुँच बना चुकी है। रेशे से बनी यह टोपी धूप से बचाने के साथ-साथ अपनी कलात्मक बनावट और आकर्षक लुक से भी विशेष पहचान बना रही है। बुरहानपुर में केले का उपयोग उत्पादित पदार्थ चिप्स, केला पावडर, स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए उपयोग हो रहा है। फरवरी माह में लगने वाला बनाना फेस्टिवल क्षेत्र को एक नई पहचान के साथ जिले की मुख्य फसल केले को नई ऊँचाइयां भी दिला रहा है।
म.प्र. ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्राम एकझिरा में लव-कुश समूह से जुड़ी श्रीमती अनुसुईया चैहान केले के रेशे से इन टोपियों को बना रही है। इस कार्य से उन्हें आर्थिक लाभ भी मिल रहा है। वे बताती है तने से रेशे निकालने के लिए मशीन खरीदकर इस कार्य को प्रारंभ किया। इससे अच्छी आय भी प्राप्त हो रही है। मशीन की सहायता से केले के तने से रेशा निकालकर, सुखाकर, सुलझाकर उससे छोटे-बड़े आकार की सुंदर-सुंदर टोपियाँ तैयार की जाती है। इन टोपियों की कीमत आकार एवं बनावट पर निर्भर करती है। मध्यम साइज की एक गोल टोपी की कीमत लगभग 1100-1200 रुपये के आसपास है। अनुसुईया दीदी अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर यह टोपियों का निर्माण करती है। वे बताती है कि उनके द्वारा तैयार की गई टोपी प्रदेश सहित देश के विभिन्न स्थानों के साथ लंदन तक जा चुकी है। लंदन में रहने वाले लालबाग क्षेत्र के परिवार के सदस्यों ने यह टोपी खरीदी है, जो उनके सहित वहां रहने वाले अन्य लोगों को भी बहुत पसंद आई। अनुसुईया दीदी प्रतिमाह 10 हजार रुपये से अधिक आय प्राप्त कर लखपति श्रेणी में आ चुकी है।
