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दमोह! जिले में रिश्वतखोरी के आरोप में लोकायुक्त ने महज 4 दिन के अंतर में ही रिश्वत लेते दूसरे अधिकारी को गिरफ्तार किया है आरोपी ने समिति की ऑडिट रिपोर्ट में गलतियां ना निकालने के एवज में 20 हजार की रिश्वत मांगी थी सहायक आयुक्त सहकारिता के विभाग के पकड़े गए ऑडिटर को 15000 की रिश्वत लेते लोकायुक्त ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया है ! लोकायुक्त टीम ने शुक्रवार की देर शाम सहायक आयुक्त सहकारिता में पदस्थ ऑडिटर रमेश प्रसाद कोरी को 15000 की रिश्वत लेते रहेंगे हाथों पकड़ लिया यह राशि ऑडिट में कोई कमी नहीं निकलने और सब दुरुस्त करने के एवज में मांगी गई थी!
खिरिया मडला समिति में पदस्थ प्रभारी समिति मैनेजर जीवनलाल पटेल ने लोकायुक्त में शिकायत की थी कि उनकी समिति के आडिट करने के नाम पर ऑडिटर रमेश प्रसाद कोरी पिछले 1 माह से चक्कर लगवा रहा था और 20 हजार रुपए की मांग पर अड़ा था मैं जब उनसे पैसे नहीं दे पाने की बात कही तो उन्होंने धमकाया था की आडिट में इतनी गलतियां निकाल दूंगा कि जिससे तुम्हें आगे दिक्कत होगी!
इस मामले की शिकायत 25 दिसंबर को सागर लोकायुक्त में शिकायतकर्ता ने की थी इसके बाद शिकायत की तस्‍दीक करने के बाद 27 दिसंबर की शाम 5:00 का समय रिश्वत देने तय किया गया था और तय समय अनुसार 15000 लेकर शिकायतकर्ता ऑफिस पहुंचा उस समय कार्यालय में अकेले आडिटर ही बैठे थे जैसे ही उन्होने 15000 लिए तो इशारा पाते ही लोकायुक्त टीम ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया !
बताया गया है कि ऑडिटर रमेश प्रसाद कोरी आडिटर के साथ जिले की 25 सहकारी समितियां का प्रशासक भी है इन सभी समितियां का आडिट इन्हीं के द्वारा किया जाता है बीते साल यह सहायक आयुक्त सहकारिता के जिला प्रभारी भी रह चुके हैं! पीड़ित का कहना है कि अन्य समितियों के कर्मचारी भी इस ऑडिटर की हरकतों से काफी परेशान थे लेकिन कोई कुछ कहने का साहस नहीं जुटा पा रहा था ! वही शिकायतकर्ता पीड़ित समिति मैनेजर जीवनलाल पटेल ने बताया कि मेरी आर्थिक स्थिति अभी ठीक नहीं है मैं इस बारे में कई बार ऑडिटर को भी बता चुका था लेकिन जब वे अपनी बात पर आने रहे तो दो दिन पहले ही खुद की 14 क्विंटल धान बेचकर जो राशि मिली वह ऑडिटर को दिए!
लोकायुक्त टीम के निरीक्षक केपीएस बेन ने बताया कि शिकायतकर्ता जीवनलाल पटेल से ऑडिटर द्वारा 15000 मांगे गए थे जिन्हें रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है व ऑडिटर के विरुद्ध भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है!

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