


दमोह। नन्हे मंदिर दमोह में चातुर्मास के पश्चात मुनि श्री प्रयोग सागर जी महाराज एवं मुनि श्री सुब्रत सागर जी महाराज का पिच्छी परिवर्तन समारोह धूमधाम से संपन्न हुआ मुनि श्री प्रयोग सागर जी महाराज की पिच्छी प्राप्त करने का सौभाग्य श्रीमती सुरभि सलिल लहरी परिवार एवं मुनि श्री सुब्रत सागर जी महाराज की पिच्छी लेने का सौभाग्य श्रीमती दिशा संगीत मंडला परिवार को प्राप्त हुआ। इसके पूर्व कार्यक्रम के प्रारंभ में आचार्य श्री एवं बड़े बाबा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन किया गया मंगलाचरण उपरांत संगीत के साथ आचार्य श्री की मंगल पूजन की गई शास्त्र भेंट किए गए शिवपुरी से पधारे श्रावक गणों ने मुनि श्री के पद प्रक्षालन करने का सौभाग्य प्राप्त किया इस मौके पर चतुर्मास स्थापना में प्रथम कलश स्थापित करने वाले विपिन जैन द्वितीय कलश मीनू जैन विजय श्री आयरन तृतीय कलश रूपचंद सौरव अरिहंत का नन्हे मंदिर कमेटी एवं जैन पंचायत के द्वारा सम्मान किया गया इसके अलावा अन्य कलश लेने वालों का भी समिति की ओर से सम्मान किया गया एवं कलश भेंट किए गए चातुर्मास में विशेष सहयोग करने वाले कार्यकर्ताओं का भी विशेष सम्मान किया गया। विशेष सहयोग करने वाले कार्यकर्ताओं एवं ब्रह्मचारी बहनों को मुनि श्री को पिच्छी भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष सुधीर सिंघई कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के पूर्व अध्यक्ष संतोष सिंघई एवं नन्हे मंदिर कमेटी के अध्यक्ष नवीन निराला के साथ अन्य लोगों को भी पिच्छी भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ इस अवसर पर मुनि श्री ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि पिच्छी परिवर्तन समारोह संयम का पर्व है इस कोमल पिच्छी से अहिंसा धर्म की रक्षा होती है सूक्ष्मजीवों के रक्षा का यह उपकरण है जो भव्य जीव इसको धारण करता है उसका कल्याण अति शीघ्र हो जाता है प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में संयम को धारण करने की मनो इच्छा रखनी चाहिए संयम और अहिंसा के माध्यम से ही इस मानव का कल्याण हो सकता है गुरु ने हम पर उपकार करके यह संयम और अहिंसा का उपकरण हमें बड़े सौभाग्य से प्रदान किया प्रत्येक व्यक्ति को इसे प्राप्त करने की भावना रखनी चाहिए।
