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तो बालाघाट में इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा रेंजर कॉलेज
कॉलेज के विस्थापन के लिए तैयार कर लिया गया है प्रस्ताव
बालाघाट। प्रदेश के इकलौता फॉरेस्ट रेंजर कॉलेज बालाघाट को अब जबलपुर में संचालित करने की तैयारी कर ली गई है। मानव संसाधन वन विभाग ने इसका प्रस्ताव भी तैयार कर लिया है। जिसे सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। रेंजर कॉलेज बालाघाट के जबलपुर स्थानांतरित होते ही यह जिले के इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा। इधर, जैसे ही रेंजर कॉलेज बालाघाट के विस्थापन की सूचना जिलेवासियों को मिली है, वैसे ही इसका विरोध भी शुरु हो गया है। इसके पूर्व भी जिलेवासियों के विरोध के चलते रेंजर कॉलेज बालाघाट का विस्थापन नहीं हो पाया था।
जानकारी के अनुसार प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फारेस्ट मानव संसाधन के डायरेक्टर एसएफआरआई द्वारा प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति बना ली गई है। शेष स्वीकृति अभी नहीं मिली है। स्वीकृति मिलने के बाद रेंजर कॉलेज का संचालन जबलपुर में किया जाएगा। रेंजर कॉलेज बालाघाट के जबलपुर स्थापित होने का अब बालाघाट में विरोध होना शुरु हो गया है। जिले के जनप्रतिनिधियों ने इसका विरोध शुरु किया है।
विस्थापन की ये है वजह
जानकारी के अनुसार जबलपुर मुख्यालय में वन अनुसंधान से जुड़े दो प्रमुख संस्थान है। इसके अलावा जबलपुर और उसके आस-पास वन पारिथितिकी तंत्र व विविधता अधिक है। जिसके कारण रेंजर कॉलेज बालाघाट को जबलपुर में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा जबलपुर मुख्यालय आवागमन की दृष्टि से भी अच्छा माना गया है।
वर्ष 1907 में हुई थी स्थापना
रेंजर्स कॉलेज की स्थापना वर्ष 1907 में फॉरेनर्स ट्रेनिंग के लिए की गई थी। बाद में नवंबर 1979 में इस संस्थान को वन रेंजर्स कॉलेज में बदल दिया गया। इसके बाद इसे केंद्र सरकार को स्थानांतरित कर दिया गया। फिर से 1 अप्रैल 1990 को कॉलेज को राज्य सरकार को हस्तांतरित कर दिया गया। रेंजर कॉलेज में प्रशिक्षु वन परिक्षेत्र अधिकारियों को टे्रनिंग दी जाती है। अब इस कॉलेज को जबलपुर में स्थापित करने की योजना तैयार की गई है।
वन परिक्षेत्र अधिकारियों को दी है ट्रेनिंग
रेंजर कॉलेज बालाघाट में प्रशिक्षु वन परिक्षेत्र अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा रिफ्रेशर कोर्स भी करवाए जाते है। जिसके चलते यहां पर बड़ी संख्या में प्रशिक्षु वन परिक्षेत्र अधिकारी ट्रेनिंग के लिए पहुंचते हैं। लेकिन रेंजर कॉलेज के विस्थापित होने से यह केवल नाम का ही कॉलेज बच पाएगा।
इनका कहना है
रेंजर कॉलेज बालाघाट प्रदेश का इकलौता कॉलेज है। यह जिले की पहचान है। जिले के राजनेताओं की कमजोरी के चलते इसके विस्थापन का प्रयास किया जा रहा है। इसका हम खुलकर विरोध करते हैं। यह विरोध लगातार जारी रहेगा।
-विशाल बिसेन, प्रदेश अध्यक्ष वैनगंगा मजदूर संघ
रेंजर कॉलेज को दूसरी बार बालाघाट से विस्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। कॉलेज के विस्थापित होते ही जिले से इसकी पहचान मिट जाएगी। इसे किसी भी किमत में विस्थापित नहीं होने दिया जाएगा। हम इसका विरोध करते हैं।

-अनूप सिंह बैस, अध्यक्ष ब्रॉडगेज संघर्ष समिति

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