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घरवालों की मर्जी के खिलाफ बगैर निकाह किए गैर मर्द के साथ रह रहीं थीं
इन्दौर ।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेश उपाध्याय की कोर्ट ने अपनी बेटी की हत्या कर उसकी लाश दफनाने वाली मां तथा उसके इस आपराधिक कृत्य में शामिल उसके भाई ( मृतक के मामा) को आजीवन कारावास की सजा सुनाते छः हजार अर्थदंड से भी दंडित किया है। वहीं प्रकरण में एक आरोपी जफर अली को दोषमुक्त कर दिया है। प्रकरण में अभियोजन पैरवी अधिवक्ता योगेश जायसवाल ने की। अभियोजन कहानी संक्षेप मे इस प्रकार है कि रावजी बाजार थाना क्षेत्र के पठान मोहल्ला में लगभग 8 साल पहले 27 मई 2017 को दोपहर में हुई एक घटना में 20 वर्षीय युवती गुलबशा उर्फ भूरा को उसकी मां और मामा ने बेल्ट और डंडों से बुरी तरह पीटा जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बारे में आसपास वालों को बताया गया कि उसको सीढ़ियों से गिरने के चलते सिर और अन्य जगह चोटें आई और उसकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद आरोपियों ने शव को कटकटपुरा कब्रिस्तान में दफना दिया था लेकिन संदिग्ध मौत की सूचना पर पुलिस ने लाश को कब्र से निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया, जिसमें हत्या की पुष्टि होने के बाद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। विवेचना में यह बात सामने आई कि मृतका युवती एक लड़के को चाहती थी और परिवार वालों की मर्जी के बगैर उसके साथ बिना निकाह किए रह रही थी। इसी बात को लेकर हुए विवाद में आरोपियों ने घटना वाले दिन उसे इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई थी। विवेचना में पाया गया कि आरोपियों ने युवती को लाठी और बेल्ट से इतना पीटा था कि पीएम रिपोर्ट में उसके शव पर 28 चोटें पाई गई थीं। पुलिस ने विवेचना के बाद चालान कोर्ट में पेश किया था लेकिन केस में एक भी प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं होने के बावजूद अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को मजबूती से कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया, जिनके आधार पर कोर्ट द्वारा मृतका की मां रेहाना बी पति मुजफ्फर अली निवासी पठान मोहल्ला और मामा आरोपी रईस खान पिता मेहमूद निवासी बजरंग नगर कांकड़ को दोषी पाते हुए उक्त सजा सुनाई गई।

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