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जबलपुर ! आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस को नियुक्तियों में अन्य आरक्षित वर्ग की भांति आयु सीमा में छूट दिए जाने के मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है सोमवार को सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत व जस्टिस विवेक जैन ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है!
करीब 20 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की गई सतना निवासी आदित्य नारायण पांडे सहित अन्य अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल सहित अन्य ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा था आशुतोष चौबे व काशी प्रसाद शुक्ला एवं अन्य और प्रदीप कुमार मिश्रा सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, रमेश प्रजापति एस कौल ने पक्ष रखा!
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि जिस तरह पूर्व में माध्यमिक व प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा में ईडब्ल्यूएस को 5 वर्ष की आयु सीमा को छूट का लाभ दिया गया था उसी तरह संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की सिविल सर्विसेज परीक्षा 2025 के ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को भी मिलना चाहिए तर्क दिया गया कि ईडब्ल्यूएस भी एससी, एसटी, ओबीसी की भर्ती आयु सीमा में छूट के लाभ के अधिकारी हैं !
गौरतलब है कि प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ईडब्ल्यूएस को आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट देते हुए उन्हें चयन प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिए थे अंतरिम आदेश में कहा गया था कि 5 वर्ष की छूट का लाभ विचाराधीन याचिका की अंतिम निर्णय के अधीन होगा और बिना अनुमति परिणाम घोषित नही किया जाएगा !

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