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मृतक के पिता ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल, कहा साक्ष के अभाव में बेटे को नहीं मिलेगा न्याय
गुना। क्राइस्ट स्कूल का वार्षिक परीक्षा का रिजल्ट घोषित हुआ। अभ्युदय जैन क्राइस्ट स्कूल में कक्षा 8वीं का छात्र था। 14 फरवरी को उसका हिंदी का पेपर था। उसी दिन घर में उसकी हत्या हो गई थी। उसने एग्जाम में जिन सब्जेक्ट के क्वेश्चन पेपर सॉल्व किए थे। उनका रिजल्ट स्कूल ने सार्वजनिक नहीं किया। पुलिस इस केस की पड़ताल के दौरान स्कूल भी पहुंची थी। संवेदनशील मामला होने के चलते स्कूल स्टाफ अभ्युदय के मामले में कोई भी बात करने से कतरा रहा है। 
8 मार्च को इस ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी सुलझाने का दावा करते हुए पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर अभ्युदय की मां अलका जैन को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा है। इस हत्याकांड को लेकर सबके अपने – अपने दावे हैं। कुछ का कहना है कि एक मां ऐसा नहीं कर सकती। कुछ का कहना है कि ऐसा कैसे संभव है कि बेटे के मर्डर के बाद मां घर का ताला लगाकर बैडमिंटन खेलने चली जाए और उसके चेहरे आंखों से कुछ जाहिर न हो। कुछ का कहना है कि कोई और भी इसमें जरूर शामिल है। हालांकि इन दावों के पीछे ठोस आधार और तथ्य किसी पर नहीं है। 
इस बीच अभ्युदय के पिता और जेल में बंद हत्या की आरोपी अलका जैन के पति अनुपम जैन ने अलका को निर्दोष बताते हुए पुलिस की विवेचना पर कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एक वीडियो जारी कर पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों को झुठलाते हुए आरोप लगाए हैं कि हमसे ही एविडेंस लिए और हमें ही फंसा दिया। उन्होंने मृतक अभ्युदय के पीएम के दौरान पेट में मिले अधपचे खाने के आधार पर हत्या का समय डिसाइड करने को भी झुठलाते हुए कहा कि डाइजेशन से इसका कोई लेना देना नहीं है बच्चा दिन भर खाता है। उन्होंने अफसरों पर भी आवेदन की पावती न देने के आरोप लगाए। उन्होंने सवाल उठाए कि प्रशासन ऐसा क्यों कर रहा है? किसके कहने से कर रहा है? क्यों षड्यंत्र रच रहा है? किसको बचाने का प्रयास कर रहा है? ये सवाल दागते हुए उन्होंने वीडियो में मीडिया और जनता से न्याय की अपील की है।
इधर पुलिस सूत्रों का कहना है कि अनुपम जैन और अलका जैन द्वारा शुरू में जो कहानी बताई गई थी उसे केंद्र में रखकर ही मामले की प्राथमिक जांच की गई। फिर पीएम रिपोर्ट में हत्या साबित होने के बाद दर्ज अपराध की विवेचना की गई। जिसमें अलका जैन द्वारा सुनाई गई कहानी बनावटी साबित हुई। मेडिकल एविडेंस और सरकमस्टेंशियल एविडेंस के सुसंगत विभिन्न साक्षियों के बयानों से पुलिस ने पिक्चर साफ करते हुए बताया कि हत्या की आरोपी अलका ही है। 
पुलिस को अभी भी संदेह है कि अभ्युदय की हत्या के बाद घटनास्थल पर भटकाने वाला सीन क्रिएट कर स्क्रिप्टेड कहानी बनाने में आरोपी अलका को किसी ने गाइड जरूर किया है। गिरफ्तारी के बाद अलका का पुलिस जांच में असहयोग भी इसी की तरफ इशारा कर रहा है। घटना के बाद पहुंचे किसी भी स्वतंत्र साक्षी ने अभ्युदय को बाथरूम के टॉवेल हैंगर पर लटके नहीं देखा था और न ही किसी को वहां वह दुपट्टा लेगी या चाकू दिखा था। सभी स्वतंत्र साक्षियों ने मृतक को बाथरूम के फर्श पर पड़ा देखा था। सिर्फ अलका ने मृतक के टॉवेल हैंगर से लटके होने उसके पैर लेगी से बंधे होने पर उसके द्वारा चाकू से दुप्पटा काटकर उतारने और लेगी काटकर पैर खोलने की कहानी सुनाई थी। अलका ने जिस तरह पतले स्क्रू से दीवार पर कसे टॉवेल हैंगर से हष्ट पुष्ट मृतक का लटकना बताया पुलिस सूत्रों के मुताबिक वैसा सीन असल में संभव नहीं है।
अब अभ्युदय के पिता अनुपम जो घटना वाले दिन 200 किमी दूर भोपाल में थे और घटना को लेकर सिलसिलेवार जानकारी देते हैं, उनके द्वारा लगाई जा रही न्याय की करुण गुहार और पुलिस पर गंभीर आरोपों के बीच यह जरूरी हो गया कि पुलिस अधिकारी इस मामले में भावुक हुए बिना प्रोफेशनल पुलिसिंग करते हुए इस गंभीर अपराध के पर्दे के सामने और पीछे यदि कोई कैरेक्टर है तो उसको भी बेधड़क उजागर करे। ताकि कोई भी निर्दोष फंसे नहीं और दोषी बचे नहीं। 
कानून के जानकारों की माने तो विवेचना में कुछ ऐसे सवालों के जवाब खोजे जाना जरूरी हो गया है जो अदालत में निर्णायक हो सकते हैं। मसलन गेट की एक और चाबी कहां है। चाकू, दुपट्टा और लेगी काटकर किसने रखे। इसके अलावा मृतक का दुपट्टे से लटके होने वाली अलका द्वारा सुनाई गई कहानी क्यों अविश्वसनीय है इस बारे में भी ठोस निष्कर्ष निकालना जरूरी है।
आमजन का यह भी कहना है कि इस विरलतम केस की विवेचना ठोस और संदेह से परे प्रमाणित तथ्यों के आधार पर की जाए ताकि अदालत में अभियोजन की कार्यवाही सिद्ध हो सके जिससे असली अपराधी कानून के छेदों से निकल कर बच न सके। कल को यदि अदालत से अपराधी बच गए तब पुलिस की बेहद किरकिरी तो होगी ही, अभ्युदय को भी न्याय नहीं मिल सकेगा।

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