
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बीजेपी नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा को तगड़ा झटका दे दिया है। विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान कथित आपत्तिजनक ट्वीट करने के मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इससे कपिल मिश्रा की मुश्किलें बढ़ना लाजमी है।
दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रविंद्र डुडेजा की पीठ ने कहा कि इस मामले में कार्यवाही रोकने की कोई आवश्यकता नहीं है। बीजेपी नेता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि आरोप तय होने की स्थिति में कपिल मिश्रा की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचेगा, लेकिन हाईकोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया। साथ ही दिल्ली पुलिस को चार हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 19 मई 2025 को तय की गई है।
क्या है पूरा मामला?
कपिल मिश्रा ने जनवरी 2020 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित भड़काऊ बयान दिए थे और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट साझा किए थे। इस मामले में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपी एक्ट) की धारा 125 के तहत उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की सजा हो सकती है। ट्रायल कोर्ट ने 22 जून 2024 को इस मामले में दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए कपिल मिश्रा को बतौर आरोपी समन जारी किया था। मिश्रा ने इस आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन 7 मार्च 2025 को रिवीजन कोर्ट ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी।
हाईकोर्ट में क्या हुआ?
बीजेपी नेता के वकील, सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि आरपी एक्ट की धारा 125 एक गैर-संज्ञेय अपराध है, और इस मामले में सीआरपीसी की धारा 155 (2) के तहत उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि मिश्रा के ट्वीट में किसी भी दो समुदायों का कोई सीधा संदर्भ नहीं था। उनका कहना था कि ट्वीट का उद्देश्य धार्मिक समुदायों के बीच दुश्मनी भड़काना नहीं था।
दिल्ली पुलिस ने किया विरोध
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सरकारी वकील ने इन दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि – मिश्रा के ट्वीट्स का उद्देश्य धार्मिक समुदायों के बीच नफरत को बढ़ावा देना था। इस मामले में दो अदालतें पहले ही मिश्रा की दलीलों को खारिज कर चुकी हैं। आरोप तय करने की प्रक्रिया के दौरान इन बिंदुओं पर विचार किया जा सकता है।
क्या होगा आगे?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद कपिल मिश्रा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अगर ट्रायल कोर्ट में उनके खिलाफ आरोप तय होते हैं, तो उन्हें तीन साल तक की सजा हो सकती है।
