
कृषि मंडी लाइसेंस जारी करने के नाम पर पूर्व नपा अध्यक्ष से मांगे थे 20 हजार
अशोकनगर । जिले की ईसागढ़ तहसील में ग्वालियर लोकायुक्त टीम की बड़ी की कार्रवाई सामने आई है। टीम ने बुधवार को ईसागढ़ कृषि मंडी के सहायक उपनिरीक्षक महेंद्र कनेरिया को 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। लोकायुक्त ग्वालियर की टीम ने आरोपी को मंडी समिति के स्टाफ कक्ष से पकड़ा। आरोपी ने रिश्वत मंडी लाइसेंस जारी करने के एवज में मांगी थी। पीड़ित ने इसकी शिकायत लोकायुक्त को की थी। शिकायतकर्ता पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष भाजपा नेता भूपेंद्र नारायण द्विवेदी ने बताया कि 11 महीने पहले उन्होंने अपनी पत्नी के नाम से मंडी में लाइसेंस के लिए आवेदन दिया था, लेकिन कर्मचारी उन्हें ही परेशान करने लगे। जब सहायक निरीक्षक महेंद्र कनेरिया से इस बारे में बात की तो उन्होंने रिश्वत की मांग की। उन्होंने एक कागज पर रिश्वत का रेट लिखकर पकड़ा दिया। उन्हें डर था कि मुंह से रिश्वत की राशि बोलने पर कहीं मोबाइल में रिकॉर्ड न हो जाए। उन्होंने मामले को निपटाने के लिए 20 हजार रुपए रिश्वत देने की बात कही। उन्होंने मंडी सचिव को फोन लगाया और 15 हजार पर डील तय हुई। द्विवेदी ने बताया कि इस मामले में मंडी सचिव प्रेम कुमार मीणा भी दोषी हैं। उन्हीं के कहने पर पैसे की मांग की गई। द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत होली से पहले लोकायुक्त में की थी, जिसके बाद पुलिस के कहने पर सारी फॉर्मेलिटी पूरी की और सबूत जुटाए। लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाया। टीम ने कहा था कि रिश्वत की रकम देने पहुंचना तो मिस्ड कॉल करना। उन्होंने ऐसा ही किया। जैसे ही पैसे दिए तुरंत लोकायुक्त को मिस्ड कॉल किया। जिसके बाद गेट पर किसान बनकर खड़ी लोकायुक्त पुलिस अंदर पहुंची और उप निरीक्षक को दबोच लिया। टीम ने उपनिरीक्षक के पैंट उतरवाकर तलाशी ली। रिश्वत की राशि पैंट की जेब लोकायुक्त टीम ने बरामद कर ली।
15 सदस्यीय टीम ने की कार्रवाई:
वहीं इस मामले में ग्वालियर लोकायुक्त निरीक्षक कविंद्र सिंह चौहान ने बताया कि जानकारी मिलने के बाद योजना तैयार कर इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। फिलहाल अभी कार्रवाई जारी है। इस ट्रैप में लोकायुक्त निरीक्षक कवींद्र सिंह चौहान, ब्रजमोहन नरवरिया, बलराम सिंह राजावत समेत 15 सदस्यीय टीम शामिल रही। उन्होने बताया कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला पंजीबद्ध कर जांच में ले लिया। ये कार्रवाई पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश के तहत की गई है।
