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कंपनी के डायरेक्टर उज्जवल किशोर और उसकी पत्नी नीलू श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया

नोएडा। अश्लील फिल्मे बनाने और बेचने के आरोप में कंपनी के डायरेक्टर उज्जवल किशोर और उसकी पत्नी नीलू श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया है। इनसे हुई पूछताछ और जांच में पता चला है कि आरोपियों ने करीब 400 लड़कियों से गंदा काम करवाया है। नोएडा के सेक्टर-105 के सी ब्लॉक में अश्लील कंटेंट तैयार किया जा रहा था। वीडियोज को साइप्रस समेत कई देशों में भेजकर वहां वेबसाइट पर अपलोड कराया जाता था और बदले में मोटी रकम ली जाती थी।सुबदीगी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के जरिए सबकुछ चल रहा था जिसके डायरेक्टर उज्जवल किशोर और उसकी पत्नी नीलू श्रीवास्तव हैं। दोनों को ईडी की टीम नोएडा से गिरफ्तार कर दिल्ली ले जा चुकी है।
अनुमान लगाया जा रहा है कि 5 साल से पोर्न का कारोबार चला रहे पति-पत्नी 400 से अधिक लड़कियों के कपड़े कैमरे के सामने उतरवा चुके थे। विज्ञापन देखकर मॉडल्स ने इनसे संपर्क किया और उनके धंधे का हिस्सा बनीं। क्रिप्टो के माध्यम से दंपती के द्वारा उपलब्ध कराए गए खातों में रकम आती थी। इसी रकम से मॉडलों को भुगतान किया जाता। रकम का महज 25 प्रतिशत युवतियों को दिया जाता, बाकी का हिस्सा दंपती अपने पास रखते थे। वीडियो शूट के लिए हाफ फेस शो, फुल फेस शो और न्यूड जैसी करीब पांच कैटेगरी थीं। काम के अनुसार मॉडल को रकम दी जाती। इस रैकेट का सरगना पहले रूस के एक सेक्स सिंडिकेट का हिस्सा रह चुका है।
नोएडा में विदेशी पोर्न वेबसाइट के लिए गंदे वीडियो बनवाने वाले एक कपल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया है। एक किराये की कोठी में स्टूडियो बनाकर बड़ा रैकेट चलाया जा रहा था। मॉडल्स से न्यूड वीडियोज बनवाकर पति-पत्नी 22 करोड़ से अधिक की कमाई कर चुके थे। अब तक की जांच में कई सनसनीखेज बातें सामने आई हैं। यह भी पता चला है कि पांच साल से यह गंदा धंधा नोएडा में चल रहा था और सैकड़ों लड़कियों को इसका शिकार बनाया जा चुका है। खबरों के अनुसार, प्राथमिक जांच में सामने आया है कि दंपती बीते पांच सालों से इस रैकेट का संचालन कर रहा था। सोशल मीडिया के माध्यम से आरोपी दंपती और उसके साथी देश के मॉडलों से संपर्क करते थे। इसके लिए फेसबुक पर एक पेज बनाया गया था। धंधा जब चल निकला तो दंपती ने इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप समेत अन्य प्लेटफॉर्म पर भी इसका विस्तार किया। ज्यादातर मॉडल दिल्ली-एनसीआर की होती थीं। सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर ऑडिशन की जानकारी दी जाती थी।

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