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गुना। न्यायालय चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश राघवेन्द्र भारद्वाज ने चर्चित लव जिहाद आत्महत्या व दहेज प्रताडऩा प्रकरण में पांच आरोपियों को दोषी मानते हुए धारा 306 में सात-सात वर्ष और धारा 498-ए में तीन-तीन वर्ष सश्रम कारावास तथा जुर्माने की सजा सुनाई है। शासन की ओर से लोक अभियोजक मुकेश कुमार जैन ने पक्ष रखते हुए आरोपियों के विरुद्ध सशक्त साक्ष्य प्रस्तुत किए।
प्रकरण के अनुसार कोतवाली थाना अंतर्गत रहने वाली जैन समाज की युवती कीर्ति उर्फ जैनब ने अपने ससुराल पक्ष की दहेज प्रताडऩा से तंग आकर 10 जुलाई 2021 को सल्फास खाकर आत्महत्या कर ली थी। पीड़िता के मायके पक्ष ने बताया कि शादी के बाद से ही कीर्ति को ससुराल वाले दहेज की मांग को लेकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे। एक से अधिक बार रुपये भी दिए गए, परंतु प्रताडऩा थमी नहीं।
घटना के बाद संजीवनी अस्पताल से पुलिस को दी गई सूचना पर मर्ग क्रमांक 29/21 दर्ज किया गया था। जांच के दौरान मृतिका के भाई कुलदीप जैन और मां लक्ष्मी जैन के बयान लिए गए, जिन्होंने कीर्ति के साथ ससुराल पक्ष द्वारा की गई दहेज प्रताडऩा की पुष्टि की। जांच में सामने आया कि पति वसीम कुरैशी सहित उसके परिवार के चार अन्य सदस्य सास निशात, ससुर जलालउद्दीन, देवर नदीमउद्दीन और नईमउद्दीन ने लगातार दहेज की मांग कर कीर्ति को प्रताड़ित किया, जिससे मानसिक दबाव में आकर उसने आत्मघाती कदम उठाया।
प्रकरण में न्यायालय ने सभी पांचों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए एवं 306 के तहत दोषी मानते हुए प्रत्येक को तीन-तीन वर्ष सश्रम कारावास व एक-एक हजार रुपये जुर्माना तथा सात-सात वर्ष सश्रम कारावास व दो-दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

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