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ईडी ने कहा- अनक्लेम्ड प्रॉपर्टी राजसात करें
भोपाल । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भोपाल ने आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा, उसके सहयोगियों शरद जायसवाल, चेतन सिंह गौर के खिलाफ अदालत में चालान पेश कर दिया है। एडवोकेट हरीश मेहता के अनुसार ईडी ने चालान में तीनों के यहां छापे के बाद पाई गई अनक्लेम्ड प्रॉपर्टी को राजसात करने के लिए कहा है। ईडी इन तीनों की 100 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति कुर्क कर चुकी है। बता दें इन तीनों के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस चालान पेश नहीं कर सकी। जिस वजह से लोकायुक्त पुलिस के केस में तीनों को जमानत मिल चुकी है।
आरटीओ के पूर्व आरक्षक करोड़पति सौरभ शर्मा ने आयकर विभाग की जांच में भले ही यह स्वीकार नहीं किया है कि राजधानी के मेंडोरी में इनोवा कार में मिला 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपए कैश उसका नहीं है लेकिन ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) भोपाल की रिपोर्ट में यह सोना और कैश सौरभ का ही बताया गया है। ईडी सौरभ शर्मा और उसके सहयोगियों चेतन सिंह गौर, शरद जायसवाल से पूछताछ के बाद 100.36 करोड़ की संपत्ति कुर्क कर चुकी है। ईडी ने तीनों को केंद्रीय जेल से न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान गिरफ्तारी कर अदालत से सात दिन की रिमांड पर लिया था। इस दौरान उनसे लंबी पूछताछ चली थी। इसके बाद ईडी ने कहा कि पूर्व आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा द्वारा अपने और रिश्तेदारों, सहयोगियों के नाम पर करोड़ों रुपए की संपत्ति जुटाई गई है। ईडी ने इन सबके स्वामित्व तथा उनके द्वारा कंट्रोल की जाने वाली फर्मों, कंपनियों, सोसायटी के नाम पर अर्जित 92.07 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया था। इन संपत्तियों को उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के प्रावधानों के तहत कुर्क किया था।
जब्त सोना, कैश सौरभ का ही
ईडी अपनी रिपोर्ट में बता चुकी है कि आयकर विभाग द्वारा 19 दिसंबर की रात चेतन सिंह गौर की इनोवा गाड़ी से जो 52 किलो सोना और 11 करोड़ नकदी जब्त किया था, वह सौरभ शर्मा का ही था। सौरभ के सहयोगियों, संस्थाओं में शरद जायसवाल, चेतन सिंह गौर, मेसर्स अविरल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स अविरल एंटर प्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स यू आर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड आदि शामिल हैं।
ब्लैक मनी को व्हाइट करते थे
ईडी ने लोकायुक्त पुलिस भोपाल द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) के साथ 13(1)(बी) के तहत सौरभ शर्मा के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। ईडी की जांच में पता चला कि सौरभ शर्मा ने अपने परिवार के सदस्यों, मित्रों, सहयोगियों के नाम पर और कंपनियों, फर्मों, सोसाइटी के नाम पर भी अलग-अलग चल और अचल संपत्तियां खरीदी थीं। इसमें अवैध तरीके से आपराधिक गतिविधि के माध्यम से मिली ब्लैक मनी को व्हाइट करके कई अज्ञात व्यक्तियों से अनसेफ लोन की व्यवस्था की गई थी। इससे पहले सौरभ शर्मा, चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल को इस मामले में गिरफ्तार किया था और वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी ने कहा है कि पहले भी तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की गई थी जिसके कारण 8.29 करोड़ रुपए के बैंक बैलेंस वाले बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था और 2.50 करोड़ रुपए की नकदी जब्त की गई थी। साथ ही 14.20 लाख रुपए और 9.17 लाख रुपए की चांदी जब्त की गई है। अब तक इस मामले में ईडी ने कुल 100.36 करोड़ रुपए की कुर्की और जब्ती की है।

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