Spread the love

जिले में 3 कृषकों पर प्राथमिकी दर्ज

दमोह: कलेक्टर दमोह श्री सुधीर कुमार कोचर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत दमोह जिले की राजस्व सीमा में नरवाई/फसल अवशेष में आग लगाने की घटनाओं पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है, जिसके परिपालन में दमोह जिले के 135 किसानों पर 3 लाख 29 हजार 400 रूपये का पर्यावरण क्षतिपूर्ति हेतु अर्थ दण्ड लगाया गया तथा तेंदूखेड़ा विकासखंड में एक कृषक, पथरिया विकासखंड में एक कृषक एवं बटियागढ़ विकासखंड में एक किसान के विरुद्ध प्राथमिकी की दर्ज कराई गई। इस प्रकार जिले में तीन कृषकों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

उप संचालक कृषि जिला दमोह जे.एल.प्रजापति द्वारा बताया कृषि विस्तार अधिकारी, पटवारी एवं कोटवार द्वारा 678 किसानों के पंचनामा बनाए गए इनमें से 576 पंचनामा संबंधित तहसील के तहसीलदार को प्रस्तुत किए गए। प्रस्तुत पंचनामा के आधार पर तहसीलदार दमोह द्वारा 07 कृषकों पर 14 हजार रूपये, तहसीलदार जबेरा द्वारा 47 कृषकों पर 1 लाख 27 हजार, तहसीलदार तेंदूखेड़ा द्वारा 16 कृषकों पर 30 हजार 400 सौ रूपये, तहसीलदार पथरिया द्वारा चार कृषकों पर 6 हजार 500 सौ रूपये, तहसीलदार हटा द्वारा 22 कृषको पर 44 हजार रूपये, तहसीलदार पटेरा द्वारा 07 कृषकों पर 27 हजार 500 सौ रूपये, बटियागढ़ तहसीलदार द्वारा 32 कृषकों पर 80 हजार रूपये का अर्थ दंड लगाया गया।

            उन्होंने कहा खेत में फसल अवशेष/नरवाई जलाने से मृदा के लाभ-दायक सूक्ष्म जीव,किसान के मित्र कहे जाने वाले केंचुए एवं जैविक कार्बन जलकर नष्ट हो जाता है, जिससे मृदा सख्त एवं कठोर होकर बंजर हो जाती है एवं फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव देखा जा रहा है। अतः किसान बंधु फसल अवशेष/नरवाई न जलायें बल्कि इसका उपयोग अच्छादन/मल्चिंग एवं स्ट्रा रीपर से भूसा बनाकर पशुओं के भोजन या भूसे के बेंचकर से अतिरिक्त लाभ प्राप्त कर सकते हैं। कृषक बिना जुताई किये हुए गेंहू की फसल की कटाई के बाद खडी नरवाई में सीधे हेप्पी सीडर/सुपर सीडर से बोनी कर सकते हैं जिससे उत्पाकदन लागत में कमी आती हैं एवं मृदा में जैविक कार्बन की मात्रा में वृद्धि होती हैं जिससे भुमि की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती हैं। बेलर, रैकर एवं चापर मशीन का उपयोग कर नरवाई के बंडल बनवाकर इन बंडलों का उपयोग फैक्ट्रियों में इधन के रूप में, आच्छादन के रूप में तथा बाद में आवश्यकता पड़ने पर भूसा बनाने का कार्य भी किया जा सकता है। ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई करने से नरवाई खेत मे दब जाती है और विघटित होकर जैविक खाद बन जाती है और कीट पतंगों के प्यूपा एवं अण्डे ऊपर आ जाते है जो तेज धूप में मर जाते है इसी तरह से खरपतवारों के बीज भी तेज धूप में अंकुरण क्षमता खत्म हो जाती है साथ ही फसलों में लगने बाले रोगों के रोग कारक भी तेज धूप के कारण मर जाते है जिससे आगामी फसल में रोग, कीट एवं खरपतवारों की समस्या भी कम होती है। रोटावेटर से जुताई करने से भी नरवाई खेत में दब जाती है और विघटित होकर जैविक खाद का रूप ले लेती है जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्वि होती है।

आदेश के उल्लंघन करने पर

            कृषक जिनके पास 02 एकड़ से कम जमीन है, उन्हें 2500/- रू0 प्रति घटना पर्यावरण क्षति पूर्ति अर्थदण्ड देय होगा। कृषक जिनके पास 02 एकड़ से अधिक एवं 05 एकड़ से कम जमीन है, उन्हे 5000/- रूपये प्रति घटना अर्थदण्ड देय होगा। कृषक जिनके पास 05 एकड़ से अधिक जमीन है उन्हे 15000/- रूपये प्रति घटना अर्थदण्ड देय होगा।आदेश का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत दण्डनीय होगा। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *