पत्नी नहीं बच्चों के भरण-पोषण के लिए पति दे राशि
कोर्ट ने शादी के 9 साल बाद शिकायत करना और एफआईआर दर्ज नहीं कराने को कोर्ट ने पैसे के लिए परेशान करने वाली बात को संदेहास्पद माना

इन्दौर । प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह कुटुम्ब न्यायालय की कोर्ट ने भरण पोषण के एक मामले में आवेदिका के आवेदन को इस आधार पर निरस्त कर दिया कि पत्नी के पास अपने पति से अलग रहने का कोई पर्याप्त वैधानिक व उचित कारण नहीं है। इसलिए पत्नी, पति से भरण पोषण प्राप्त करने की अधिकारी भी नहीं है। भले ही वह स्वयं के भरण-पोषण में सक्षम नहीं है। लेकिन सक्षम न्यायालय ने इसी आवेदन पर पत्नी को बच्चों के भरण-पोषण हेतु 15 हजार रुपए महीने देने का आदेश पति के दिया
कोर्ट के इस अपने तरह के अनूठे और पहले निर्णय को वकीलों और कानून विशेषज्ञों ने अनोखा और स्वागत योग्य माना है। कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि, पत्नी स्वयं का भरण पोषण करने में सक्षम नहीं है और पति अपनी पत्नी और बच्चों का भरण पोषण नहीं कर रहा है, किन्तु पत्नी के पास अपने पति से अलग रहने का कोई पर्याप्त वैधानिक व उचित कारण नहीं है। इसलिए पत्नी, पति से भरण पोषण प्राप्त करने की अधिकारी नहीं है। प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि सुलोचना पति अमन निवासी गौरीनगर ने 2022 में अपने पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कराते बताया था कि ट्रक व्यवसायी अमन के साथ उसकी शादी 2013 में हुई थी। शादी के बाद से ही पति अमन कम दहेज लाने के लिए परेशान कर रहे हैं। दहेज न लाने पर ताने मारना, अपशब्द कहना, मारपीट करना और बच्चों की डिलीवरी का खर्चा उठाने से मना कर दिया। इतना ही नहीं पांच लाख रुपए दहेज भी मांगा। सुलोचना ने बताया कि मई 2022 में घर से निकाल दिया। जिसके बाद उसने शिकायत हीरा नगर थाने में की। शादी के 9 साल बाद 2022 की गई इस शिकायत के आधार पर सुलोचना ने अपने और बच्चों के भरण पोषण की मांग करते हुए कुटुंब न्यायालय की शरण ली। एडवोकेट कृष्ण कुमार कुन्हारे ने पति अमन की ओर से जवाब देते हुए कोर्ट से कहा कि सुलोचना ने यह केस झूठे आधार पर प्रस्तुत किया है। मैंने या मेरे परिवार ने पत्नी सुलोचना को कभी परेशान नहीं किया। पत्नी सुलोचना ने मुझसे 17 हजार खुद के भरण पोषण और 18 हजार रुपए दोनों के बच्चों के लिए मांगे। उसका ये दावा गलत है कि मेरी आय डेढ़ लाख रुपए महीने है। इतना ही नहीं मेरा डेबिट कार्ड भी वह उपयोग कर रही है। एडवोकेट कुन्हारे द्वारा अमन की और से कोर्ट में पेश उक्त जवाब के बाद कोर्ट ने अमन की आय 60 हजार रुपए मानते हुए दोनों बच्चों के भरण पोषण के लिए 15 हजार रुपए महीने देना तय किया। कोर्ट ने शादी के 9 साल बाद शिकायत करना और एफआईआर दर्ज नहीं कराने को हास्यास्पद मानते कोर्ट ने पैसे के लिए परेशान करने वाली बात को संदेहास्पद माना।
